उदयपुर। हंसी के बीच चुभता सच। उर्दू के प्रसिद्ध अफसाना निगार स्वर्गीय कृष्ण चन्दर की कालजयी कहानी ‘जामुन का पेड़’ पर आधारित नाटक रविवार को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन संचालित पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में मंचित किया गया।पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया की प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला के अंतर्गत रंग शिल्प नाट्य समिति जयपुर द्वारा ‘जामुन का पेड़’ नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया।
इस नाटक का लेखन नीरज गोस्वामी ने किया एवं निर्देशन ईश्वर दत्त माथुर ने किया। यह नाटक स्व. कृष्ण चन्दर की कहानी पर आधारित है।
इस नाटक की विशेषता यह थी कि इसमें 70 प्रतिशत कलाकारों की उम्र 70 वर्ष के करीब थी।नाटक में कलाकारों ने एक आम व्यक्ति की कहानी दिखाई, जो सचिवालय परिसर में गिरे जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए एक-दूसरे पर दोष मढ़ते नजर आते हैं। वहीं आम जनता और विपक्षी नेता भी इस स्थिति का अपने-अपने हितों के लिए उपयोग करने से पीछे नहीं रहते है।
मदद के इंतजार में तड़पते इंसान और फाइलों में उलझे सिस्टम की विडंबना दर्शकों को हंसाती भी है और भीतर तक बैचेन भी करती है। दर्शकों से खचाखच भरे दर्पण सभागार में प्रस्तुत नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा।
सिद्धांत भटनागर ने लाईट संचालन किया। अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, कार्यक्रम अधिशासी हेमंत मेहता सहित केन्द्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन केन्द्र के सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।