जैसलमेर । वैदिक सरस्वती नदी क़े पुनरुधार के लिए गठित हरियाणा सरस्वती बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमाच ने जैसलमेर का दौरा कियां। दो दिवसीय दौरे के दौरान किरमाच ने जैसलमेर मे सरस्वती नदी के अनुसधान को ले कर स्थानीय लोगो व अधिकारियो के साथ चर्चा की तथा फील्ड विजिट की।

              सर्किट हॉउस मे मीडिया प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते हुए धूमन सिंह ने बताया की हरियाणा सरकार ने सरस्वती नदी अनुसधान मे काफ़ी प्रगति की है। सरस्वती बोर्ड के प्रयासों से हरियाणा मे नदी के मार्ग को पूनर्जिवित कर उसमे पानी का प्रवाह भी शुरू कर दिया है। इसी प्रवाह को आगे बढ़ाने के लिए वे राजस्थान मे पूर्व मे हुवे अनुसधान के साथ नई संभावनाएं तलाश रहे है।

              उन्होंने बताया की जैसलमेर मे पुराजल प्रवाह व सरस्वती नदी को लेकर अपार संभावनाएं है। यहां भी हरियाणा सरकार की तरह काम हो इसके लिए वो राजस्थान सरकार से बात करेंगे।

       वरिष्ठ भू जल वैज्ञानिक डॉ नारायण दास इणखिया ने किरमाच को जैसलमेर जिले के पुराजल प्रवाहों व जिले मे सरस्वती नदी को लेकर हुवे अनुसधान के बारे मे विस्तृत जानकारी दी।

       किरमाच ने फील्ड विजिट के दौरान कानोद व हडा एरिया मे रण का भी भृमण किया। उन्होंने बताया की सरस्वती नदी कच्छ के रण मे जाकर मिलती थी। कानोद रण को देखने से यह रण भी कच्छ के रण की तरह लगता है। अतः यह सम्भव है की सरस्वती नदी का यह प्रवाह एरिया रहा हो। इसके लिए भविष्य मे अनुसधान हो इसके प्रयास होंगे। उनके साथ समाज सेवी पूरण सिंह भाटी, इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के अधीक्षण अभियंता  मधुसूदन राजोत व अन्य अधिकारी साथ रहे।