श्रीगंगानगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सोनी धर्मशाला के निकट स्थित केंद्र की बहनों ने आज केंद्रीय जेल पहुंचकर बंदियों को राखी बांधी और उन्हें सद्कर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
इस आत्मीय कार्यक्रम में बंदियों ने नशा मुक्त जीवन जीने का दृढ़ संकल्प लिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके ऊषा ने रक्षाबंधन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि सामान्यतः हम समझते हैं कि रक्षाबंधन केवल बहन द्वारा भाई की कलाई पर रेशम का धागा बांधना और भाई द्वारा रक्षा का वचन देना है।
लेकिन आज के समय में जब स्वयं भाई भी जीवन की अनेक चुनौतियों और आंतरिक कमजोरियों से जूझ रहा है, तब सच्ची रक्षा कौन कर सकता है?बीके ऊषा ने बताया कि हमारा सबसे बड़ा रक्षक परमपिता परमात्मा है, जो कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता।
उन्होंने कहा कि इस पावन पर्व के पीछे रक्षासूत्र या राखी केवल सूत का धागा नहीं, बल्कि भगवान से किया गया एक दृढ़ संकल्प है।
उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पुरानी कड़वी यादों और नकारात्मक संस्कारों को छोड़कर एक-दूसरे को दुआओं, शुभकामनाओं और शुभ संकल्पों का उपहार दें।इस पावन अवसर पर सभी बंदियों ने अपने जीवन को नशा मुक्त बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
इसके उपरांत ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी बंदियों को पवित्रता का रक्षा सूत्र बांधा और मुख मीठा कराया।कार्यक्रम में ललित्या ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “मैं भारत का जवान हूं” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।इस कार्यक्रम में रितु, कंचन, रवि और वेदप्रकाश भाई ने विशेष सहयोग दिया।
जेल अधीक्षक महावीर मीणा ने ब्रह्माकुमारी बहनों के इस सद्कार्य की सराहना की। जेलर चरणसिंह और हेमराज भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
बीके बहनों ने इन अधिकारियों को भी रक्षा सूत्र बांधे।