उदयपुर। बिहार सरकार के कृषि मंत्री एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर का दौरा कर विश्वविद्यालय की शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का अवलोकन किया। लगभग दो घंटे तक चले भ्रमण के दौरान उन्होंने विभिन्न अनुसंधान इकाइयों का निरीक्षण किया और वैज्ञानिकों के साथ कृषि नवाचारों एवं किसानों के हित में संचालित परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर कृषि मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर कुलगुरु ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान कार्यों, कृषि प्रौद्योगिकी में नवाचारों तथा किसानों के लिए संचालित विस्तार कार्यक्रमों की जानकारी दी।
इसके बाद श्री सिन्हा ने प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय (CTAE) का भ्रमण किया। उन्होंने फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग विभाग की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर कृषि यंत्रीकरण, आधुनिक कृषि उपकरणों के विकास, मशीन परीक्षण एवं ऊर्जा दक्ष तकनीकों से जुड़े अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की। विभागाध्यक्ष डॉ. सांवल सिंह मीणा ने विभाग द्वारा विकसित कृषि यंत्रों, अनुसंधान परियोजनाओं तथा विद्यार्थियों को दिए जा रहे व्यावहारिक प्रशिक्षण की जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री ने कृषि यंत्रीकरण को किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
इसके पश्चात उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा इंजीनियरिंग विभाग का दौरा किया, जहां डॉ. नारायण लाल पंवार ने सौर ऊर्जा, बायोगैस, बायोमास, ऊर्जा संरक्षण तथा कृषि में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से संबंधित अनुसंधान एवं तकनीकों की जानकारी दी। विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय परियोजनाओं तथा किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी जानकारी साझा की गई।

राजस्थान कृषि महाविद्यालय पहुंचकर कृषि मंत्री ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार महला ने उनका स्वागत करते हुए महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों से अवगत कराया।
भ्रमण के दौरान श्री सिन्हा ने मशरूम उत्पादन एवं अनुसंधान इकाई का निरीक्षण किया। इकाई प्रभारी डॉ. नारायण लाल मीणा ने खाद्य एवं औषधीय मशरूमों के उत्पादन, स्पॉन निर्माण, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों, गुणवत्ता प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन संबंधी कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों एवं युवाओं के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, जिससे स्वरोजगार एवं आयवृद्धि के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। कृषि मंत्री ने मशरूम उत्पादन को किसानों की आय विविधीकरण और पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इसके बाद उन्होंने जैविक खेती इकाई का निरीक्षण किया, जहां डॉ. रविकांत शर्मा ने जैविक पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार से संबंधित अनुसंधान एवं प्रदर्शन गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने जैविक प्रमाणन, अवशेष-मुक्त कृषि उत्पादन तथा किसानों के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से बताया।
कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के कृषि संग्रहालय का भी अवलोकन किया। डॉ. रामेश्वर लाल सोनी ने राजस्थान की कृषि विरासत, आधुनिक कृषि विकास तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत फसल किस्में पारंपरिक किस्मों की तुलना में 25 से 35 प्रतिशत अधिक उत्पादन देती हैं। कृषि संग्रहालय के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव बैराठी ने बताया कि संग्रहालय में लगभग 34 आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया गया है तथा प्रतिवर्ष 1800 से 2500 किसान एवं विद्यार्थी इसका भ्रमण कर लाभान्वित होते हैं।
भ्रमण के अंतिम चरण में अनुसंधान निदेशालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से चर्चा की। डॉ. रामेश्वर लाल सोनी ने विश्वविद्यालय में संचालित प्रमुख अनुसंधान परियोजनाओं एवं कृषि नवाचारों की जानकारी प्रस्तुत की। श्री सिन्हा ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाने पर बल दिया।
अपने संबोधन में श्री विजय कुमार सिन्हा ने प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर देशी गोवंश आधारित, कम लागत वाली एवं पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, भूमि की उर्वरा शक्ति संरक्षित रहेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ. सुधीर वर्मा (संयुक्त निदेशक, कृषि), श्री अशोक कुमार (कुलसचिव), विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, प्राध्यापक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि कृषि मंत्री का यह दौरा कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा बिहार और राजस्थान के बीच कृषि एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा।
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