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 नवलखा महल के प्रकल्प राष्ट्र प्रेम के भक्ति के केन्द्र

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16 Jul 26
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 नवलखा महल के प्रकल्प राष्ट्र प्रेम के भक्ति के केन्द्र

-डॉ. प्रेमचन्द बैरवा
उदयपुर। नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के प्रकल्प वास्तव में राष्ट्र भक्ति के प्रकल्प हैं। ये विचार राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने व्यक्त किए। वे आज उदयपुर के गुलाब बाग स्थित नवलखा महल के अंतर्गत बने विभिन्न प्रकल्पों को अवलोकन करने यहां पधारे। उन्होंने कहा कि नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के अंतर्गत राष्ट्र मंदिर का प्रकल्प जो कि महान् दानवीर महाशय धर्मपाल जी के पुत्र महाशय राजीव जी गुलाटी द्वारा तैयार करवाया गया वह वास्तव में राष्ट्र भक्ति का केन्द्र हैं। इस प्रकल्प में ऐसे क्रान्तिकारियों के सिलिकॉन स्टैच्यू तैयार किए गए हैं जो मानो जीवन्त लगते हैं। इन स्टैच्यू के साथ ही इनके जीवन चरित्र तथा राष्ट्र के लिए इनके समर्पण कार्य आदि का वर्णन भी किया गया है। वास्तव में यहां के प्रकल्प अनुकरणीय व प्रेरणा प्रदान करने वाले हैं जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहूति दी परन्तु वे इतिहास के पन्नों में गुमनाम है। ऐसे क्रान्तिकारियों के राष्ट्र समर्पण के कार्याें को जनमानस तक पहुंचाने का कार्य श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष श्री अशोक जी आर्य और उनकी टीम द्वारा किया गया है वास्तव में यह सराहनीय कार्य है। डॉ. बैरवा ने इसके अतिरिक्त यहां आर्यावर्त चित्रदीर्घा, संस्कार वीथिका, सुरेशचन्द दीनदयाल गुप्त मिनी थियेटर, राष्ट्रोन्नायक वीथिका आदि का भी अवलोकन किया।
डॉ. बैरवा ने कहा कि युग प्रवर्तक समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अपने जीवनकाल में 30 से अधिक ग्रन्थों की रचना की। इनमें से उनकी प्रमुख कृति सत्यार्थ प्रकाश की रचना यहां नवलखा महल में की। अतः यह स्थल ऐतिहासिक महत्व के साथ ही आर्य समाज का प्रमुख केन्द्र भी है। अतः आमजन से मेरा आग्रह है कि कम से कम एक बार उनको यहां का अवलोकन अवश्य करना चाहिए।
इस अवसर पर उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने समाज सुधार के साथ साथ देश की आजादी के लिए भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश की स्वतंत्रता के लिए मानगढ़ जैसा आन्दोलन गोविन्द गुरु के नेेतृत्व में हुआ। गोविन्द गुरु महर्षि दयानन्द के शिष्य थे। उन्होंने महर्षि जी ने नवलखा महल में ही शिष्यत्व प्राप्त किया और उनसे प्रेरणा प्राप्त की। आज यह स्थल विश्वभर में अपनी पहचान बना चुका है तथा राजस्थान राज्य के पर्यटन स्थलों की सूची में सम्मिलित है। इसके विकास के लिए मेरा हर संभव प्रयास रहेगा।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान एवं राजस्थान सहकारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वरिष्ठ नेता श्री प्रमोद सामर ने कहा कि मेरा जुड़ाव इस स्थल को आर्य समाज को सुपुर्द करने के समय से ही रहा है। यहां आकर गहन शांति की अनुभूति होती है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी,उदयपुर देहात के पूर्व अध्यक्ष श्री भंवर सिंह पंवार ने कहा कि यह स्थल अद्भुत होने के साथ ही अनुकरणीय है।
नवलखा महल आगमन पर डॉ.बैरवा, डॉ.रावत व अन्य अतिथियों का मेवाड़ी पगड़ी, उपरणा पहनाकर न्यास अध्यक्ष श्री अशोक आर्य व उनकी टीम द्वारा स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष श्री अशोक आर्य ने बताया कि नवलखा महल वह स्थल है जो कि मेवाड़ शासन का गेस्ट हाउस था। मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा सज्जनसिंह जी के आमंत्रण पर महर्षि दयानन्द सरस्वती उदयपुर पधारे और गुलाब बाग स्थित इस नवलखा महल में उन्होंने साढ़े छः माह प्रवास किया। उदयपुर प्रवास के दौरान उन्होंने अपनी महान् कालजयी कृति सत्यार्थ प्रकाश का प्रणयन यहां किया था। आर्य समाज को प्राप्त होने से पूर्व यह स्थल राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग का गोदाम था। 1992 में राजस्थान सरकार से यह 99 वर्ष की लीज पर आर्य समाज को प्राप्त हुआ तब यह स्थल पूर्ण जीर्ण शीर्ण अवस्था में था। राजस्थान सरकार ने यह स्थल आर्य समाज को देते समय यह लीज की शर्ताें में यह शर्त लगाई थी कि इस स्थल को महर्षि दयानन्द का भव्य स्मारकं बनाया जाए। राजस्थान सरकार की इस शर्त की पालना करते हुए इस स्थल का कायाकल्प आर्य समाज के दानवीरों के सहयोग से किया गया और यह स्थल आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ख्याति स्थापित कर चुका है। इस स्थल के महत्व को समझते हुए राजस्थान सरकार ने इसे राजस्थान राज्य के पर्यटन स्थलों की सूची में डाला है।
इस अवसर पर न्यास के संयुक्त मंत्री डॉ. अमृत लाल तापड़िया,आर्य समाज,हिरणमगरी के प्रधान श्री संजय शांडिल्य न्यास पूर्व प्रधान श्री भंवर लाल आर्य के जनसम्पर्क सचिव श्री विनोद राठौड़, एनएमसीसी यूथ क्लब की उषा चौहान, न्यास के कार्यालय मंत्री श्री भंवर लाल गर्ग, पुरोहित श्री नवनीत आर्य, लेखाकार श्री दिव्येश सुथार, कार्यालय संयोजिका श्रीमती दुर्गा गोरमात,, गाइड श्री सिद्धम,श्री गौरव, श्रीमती रेखा, श्रीमती निरमा,श्री देवीलाल,श्री रवीन्द्र राठौड़ सहित न्यास के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।


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