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माही टॉक फेस्ट 4.0: कला, साहित्य और संवाद का उत्सव

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24 Jan 26
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माही टॉक फेस्ट 4.0: कला, साहित्य और संवाद का उत्सव

बांसवाड़ा । गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय और विश्व संवाद केन्द्र उदयपुर के तत्वावधान में कला, साहित्य और वैचारिक संवाद के उत्सव के रूप में आयोजित माही टॉक फेस्ट 4.0 के अंतर्गत बांसवाड़ा जिले को एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। इस अवसर पर जिले में पहली बार नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) के पुस्तक मेले और संविधान विषयक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसने बांसवाड़ा के शैक्षणिक और बौद्धिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की है। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस आयोजन को पाठकों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

कुलगुरु ने किया उद्घाटन, कहा— पुस्तकें अमूल्य धरोहर :

माही टॉक फेस्ट के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट के बुक फेयर और संविधान विषयक प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने मौली बंधन खोलकर किया। इस अवसर पर प्रो. राजश्री चौधरी एवं रुचि श्रीमाली ने अतिथियों को बुक फेयर और प्रदर्शनी के उद्देश्य, विषयवस्तु और महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन पाठकों को भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन विचारधाराओं से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने प्रदर्शित पुस्तकों को देखा और इसकी विषयवस्तु की तारीफ की।

कुलगुरु ने खरीदी पुस्तकें, कहा—युवाओं में पढ़ने की प्रवृत्ति विकसित करनी जरूरी :

उद्घाटन के पश्चात कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने नेशनल बुक ट्रस्ट, विश्व संवाद केंद्र एवं अन्य प्रकाशकों के स्टॉलों का अवलोकन किया और विभिन्न पुस्तकों की खरीदारी की। उन्होंने इन पुस्तकों का भुगतान आनलाइन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान की धरोहर हैं। ये व्यक्ति के चरित्र निर्माण और राष्ट्र के बौद्धिक विकास की आधारशिला होती हैं। उन्होंने युवाओं में पढ़ने की प्रवृत्ति विकसित करने की आवश्यकता जताई और कहा कि किताबें वास्तव में अमूल्य होती हैं। उन्होंने कहा कि कला, साहित्य और संवाद के इस उत्सव के अंतर्गत आयोजित नेशनल बुक ट्रस्ट का बुक फेयर और संविधान विषयक प्रदर्शनी बांसवाड़ा में पुस्तक संस्कृति और संवैधानिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

500 से अधिक टाइटल और 2000 से ज्यादा पुस्तकें पाठकों के लिए

तीन दिवसीय बुक फेयर में साहित्य, इतिहास, संविधान, जनजातीय अध्ययन, संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रबोध से संबंधित 500 से अधिक टाइटल और 2000 से ज्यादा पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं संविधान विषयक प्रदर्शनी में भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया, उसकी मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

शिक्षाविदों, युवाओं और पाठकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार कश्मी कौर, प्रो. राजेश जोशी, प्रो. नरेंद्र पानेरी, डॉ. प्रमोद वैष्णव, डॉ. राकेश डामोर, साहित्यकार नरेन्द्र मदनावत सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे। विश्व संवाद केंद्र की ओर से मदन मोहन टांक, डॉ. कमलेश शर्मा, डॉ. सुनील कुमार खटीक, विकास छाजेड़, नीरज श्रीमाली, मामराज, जयराज सहित बड़ी संख्या में युवा, विद्यार्थी और विश्वविद्यालय स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता निभाई।


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