GMCH STORIES

श्रीराम प्रभु की लीलाओं का बखान किया  - महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज

( Read 397 Times)

07 Jun 26
Share |
Print This Page

श्रीराम प्रभु की लीलाओं का बखान किया  - महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज

चतुर्थ दिवस महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गड़ा में प्रवचन देते हुए ।
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का  गड़ा द्वारा आयोजित श्री राम कथा में दिन-प्रतिदिन भक्तों का सैलाब बढ़ता जा रहा है । रविवार को चैथे दिन महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने प्रभु श्रीराम की लीलाओं का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि गुरुकुल में अपनी शिक्षा प्राप्त कर श्रीराम वापस अयोध्या आए । इसके बाद विश्वामित्रजी ने राजा दशरथ से प्रभु राम व लक्ष्मण को मांगा और अपनी पृष्ठ भूमि तैयार करते हुए रास्ते में ताड़का वध किया और गौतम ऋषि की पत्नी आहल्या का उद्धार किया । विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम ने जनकपुरी में प्रवेश किया । महाराजश्री ने बताया कि श्रीराम जी का जानकी जी से पहला मिलन पुष्प वाटिका में हुआ । वहीं से श्री जानकी जी का आदर्श चरित्र शुरु होता है । श्री जानकी जी प्रभु श्री राम का आधार थीं ।
जैसी संगत, वैसा प्रभाव जीवन पर: महामण्डलेश्वर हरिओमदास महाराज
प्रभु की कृपा रूपी रस को पीने के लिए असंख्य भक्तजन कथास्थल पर अपनी हाजरी लगा रहे है । आज प्रभु की पावन कथा को उपस्थित भक्तों के समक्ष रखते हुए महाराज श्री ने कहा कि जब भगवान श्री राम एवं माता सीता का विवाह हुआ तो सारी नगरी प्रसन्न एवं आनन्द विभोर थी । एक दिन राजा दशरथ श्रीराम को राज्य का उत्तराधिकारी बनाने का संदेश सभी को बता देते हैं, तभी मंथरा जो कि राजी कैकेयी की दासी थी, वह रानी कैकैयी को तरह-तरह के बुरे विचारों को प्रदान करती है, जिसे सुन रानी कैकेयी की बुद्धि भ्रमित हो जाती है । वह राजा दशरथ से श्रीराम के लिए 14 वर्षों का वनवास और राजकुमार भरत के लिए राज्य मांगती है । तभी श्रीराम पिता से आज्ञा लेकर वन की और प्रस्थान करते है । महाराजश्री ने कहा कि हम अपने जीवन में जैसे संगत करते हैं, वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता है । बुरे लोगों की संगत हमें बुरा बनाती है और अच्छे लोगों की संगत अच्छा, निर्णय हमारे हाथ में है कि हम कैसी संगत करते है ।
आज की कथा में श्री जगदीशदासजी महाराज छोटे मुरारी बापु एवं धर्मराजजी भाई साहब भारत माता मंदिर बाँसवाड़ा परियोजना प्रमुख केन्द्र बाँसवाड़ा का आशीर्वचन एवं सानिध्य प्राप्त हुआ ।
इसके साथ ही सायं 5 बजे भगवानजी को भोग एवं उसके बाद व्यासपीठ की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया ।
 


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like