बांसवाड़ा। धर्म, साधना और तपस्या की ऐतिहासिक स्थली श्री लालीवाव मठ में बुधवार को प्रस्तावित 'श्री पद्मनाभ गोकुलम् (गौशाला) सामुदायिक भवन' का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन एवं शिलान्यास सम्पन्न हुआ।
समारोह के साथ ही मठ परिसर में 1008 पौधे लगाने के लक्ष्य वाले व्यापक पौधारोपण अभियान का शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गौसंरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं सनातन संस्कृति के संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्जुनसिंह बामनिया ने लालीवाव मठ के पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज, गुरु आश्रम छींच के ब्रह्मपीठाधीश्वर श्रीमहंत घनश्यामदासजी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय सह मंत्री एवं भारतमाता मंदिर के महंत रामस्वरूपजी महाराज, घाटोल विधायक नानालाल निनामा तथा जिला कांग्रेस संगठन महासचिव मनीष एन. त्रिवेदी सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति में भूमि पूजन कर शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया।
वैदिक कर्मकाण्ड प्रमुख आचार्य पं. कमल भट्ट (झड़स) तथा सह-आचार्य पं. अमित भट्ट के सान्निध्य में अभिमंत्रित शिलाओं की स्थापना, आरती, पुष्पांजलि एवं गौपूजन सम्पन्न कराया गया।
1008 पौधों से होगा हरित विकास
भूमि पूजन के उपरांत संत-महात्माओं एवं अतिथियों ने अशोक का पौधा लगाकर पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया। मठ परिसर, परिधि क्षेत्र तथा खेतों की मेड़ों पर स्थानीय एवं धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण 1008 पौधे लगाए जाएंगे।
धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं : बामनिया
समारोह को संबोधित करते हुए विधायक अर्जुनसिंह बामनिया ने कहा कि बांसवाड़ा की पहचान 'लोढ़ी काशी' के रूप में है और यहां स्थित मंदिरों एवं तीर्थस्थलों को एक सुव्यवस्थित धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इससे क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होने के साथ पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति, गौसेवा और धार्मिक परम्पराओं के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर सहयोग करना चाहिए।
संतों ने दिया गौसेवा एवं संस्कृति संरक्षण का संदेश
महामण्डलेश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज ने लालीवाव मठ की ऐतिहासिक परम्पराओं एवं भविष्य की विकास योजनाओं की जानकारी दी।
श्रीमहंत घनश्यामदासजी महाराज ने गौ एवं तुलसी को भारतीय संस्कृति का आधार बताते हुए इनके संरक्षण को मानव कल्याण से जोड़ा।
नानालाल निनामा ने धर्म एवं समाज सेवा में जनसहभागिता को आवश्यक बताया, जबकि महंत रामस्वरूपजी महाराज ने गौसेवा को वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताते हुए सभी गौभक्तों से सहयोग का आह्वान किया।
सभी वक्ताओं ने प्रस्तावित श्री पद्मनाभ गोकुलम् को क्षेत्र की महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल बताते हुए समाज से इसके निर्माण एवं संचालन में सक्रिय सहयोग का आग्रह किया।
भामाशाहों ने की सहयोग घोषणाएं
कार्यक्रम के प्रारम्भ में सिटीजन फोरम के अध्यक्ष शैलेन्द्र भट्ट ने श्री पद्मनाभ गोकुलम् परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। समारोह में अनेक भामाशाहों एवं श्रद्धालुओं ने गौशाला निर्माण एवं गौसेवा के लिए उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग देने की घोषणाएं कीं।
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध मंच संचालक डॉ. दीपक द्विवेदी ने किया तथा आभार मनीष एन. त्रिवेदी ने व्यक्त किया।
समारोह में पूर्व नगरपालिकाध्यक्ष राजेश टेलर, चौबीसा समाज अध्यक्ष सुधीर चौबीसा, दिगम्बर जैन ग्लोबल महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश सिंघवी, देवबाला राठौड़, राजेश मेहता, शंकरलाल आचेरी, सियारामदास महाराज, नटवरभाई तेली, मुकेश जोशी, विमल भट्ट, पं. विपीन भट्ट, शांतिलाल तेली, रमेश तेली, बाबूसिंह तंवर, श्रवणसिंह, भंवरलाल धाकड़, अनिमेष पुरोहित, राजपालसिंह सिसोदिया, कान्तिलाल सोनी, प्रदीप पंचाल, पं. मनोहर जोशी, रामशंकर जोशी, मुकेश जरादी, सुनील बरोड़िया, अरविन्द खेरावत, शांतिलाल भावसार, मिथिलेश कौशिक सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।