उदयपुर।211 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार प्रो. डॉ. इक़बाल सक्का ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अवसर पर एक ऐसी अनूठी कलाकृति तैयार की है, जिसने हर भारतीय के मन में उठने वाली उस भावना को सजीव कर दिया है, जब विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर तिरंगा नज़र नहीं आता।
चांदी से निर्मित फीफा मैदान, हरी घास की आकर्षक सज्जा और 50 झंडों से सुसज्जित इस कलाकृति में 48 प्रतिभागी देशों के राष्ट्रीय ध्वज, एक फीफा वर्ल्ड कप का ध्वज और भारतीय तिरंगा स्थापित किया गया है। यह तिरंगा उस अधूरे सपने और उम्मीद का प्रतीक है कि एक दिन भारत भी विश्व कप के मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा।
इस कलाकृति का सबसे अद्भुत आकर्षण है विश्व की सबसे छोटी स्वर्ण कलाकृति, जिसे केवल सूक्ष्म लेंस से देखा जा सकता है। इसमें दो फुटबॉल खिलाड़ियों की आकृतियों के साथ फीफा ट्रॉफी और फुटबॉल को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। यह सूक्ष्म शिल्प भारतीय प्रतिभा और तिरंगे के सम्मान का अनूठा संदेश देता है।
डॉ. सक्का ने भावुक स्वर में कहा,
"जब 48 देशों के झंडों के बीच अपना तिरंगा दिखाई नहीं देता, तो हर भारतीय के मन में एक टीस उठती है। मेरी यह कलाकृति उसी भावना की अभिव्यक्ति है।"
उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय फुटबॉल टीम को फीफा वर्ल्ड कप खेलते और विश्व विजेता बनते देखना है। उस ऐतिहासिक क्षण पर वे अपनी यह विश्व रिकॉर्ड कलाकृति और विश्व की सबसे छोटी स्वर्ण फीफा ट्रॉफी भारतीय खिलाड़ियों को समर्पित करना चाहते हैं।
डॉ. सक्का ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय खेल मंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जब तक भारतीय टीम फीफा विश्व कप में स्थान नहीं बना लेती, तब तक इस अनूठी कलाकृति को किसी राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाए, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे और भारतीय फुटबॉल के सुनहरे भविष्य का प्रतीक बन सके।