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स्थानांतरण पॉलिसी लागू कर ही ट्रांसफर हो, डिजायर पद्धति का विरोध करेंगे:- सियाराम शर्मा

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01 Jul 26
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स्थानांतरण पॉलिसी लागू कर ही ट्रांसफर हो, डिजायर पद्धति  का विरोध करेंगे:- सियाराम शर्मा

बांसवाड़ा। राजस्थान में जिस सरकार को लाने स्थापित करने में कर्मचारियों के सबसे बड़े संवर्ग शिक्षकों का योगदान अहम रहा है उसी सरकार में शिक्षा शिक्षक शिक्षार्थी सर्वाधिक पीढ़ित है शिक्षकों के ट्रांसफर प्रमोशन काउंसलिंग प्रक्रिया में पदस्थापन एक उद्योग बन गया है शिक्षा जैसे पवित्र विभाग में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया हैं इसलिए स्थानांतरण पॉलिसी लागू कर ही ट्रांसफर हो, डिजायर पद्धति का विरोध करेंगे । 

ट्रांसफर उद्योग बन्द हो अन्यथा अगली बार दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं होगा ओर बदलेगी सरकार । उन्होंने पंचायतों,नगर निगम के चुनावों को नहीं कराने पर उलहाना दिया कि कब तक बकरे की मां खैर मनाएगी?
यदि आज चुनाव करवाए जाए तो राज्य सरकार की विदाई तय है राजस्थान में कही भी लग ही नहीं रहा हैं कि लोक कल्याणकारी सरकार चल रही हैं।

यह कहना है वर्योवृद्ध शिक्षाविद सियाराम शर्मा का । वो आज बांसवाड़ा प्रवास पर गढ़ी उपखण्ड में शिक्षकों की सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों की दशा ओर दिशा दोनों राष्ट्रवादी सरकार के हाथों में होते हुए भी बिगड़ी हुई हैं ट्राइबल क्षेत्र सहित राज्य भर के विद्यालय जर्जर भवन मौत के कुएं बन गए है यानि कब गिर जाए पता नहीं चलेगा।

भवन निर्माण के समय कमीशन खोरी के खेल के प्रश्नों को लेकर कहा कि ऑनलाईन ठेका पद्धतियों से मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की । अर्थात भ्रष्टाचार ही हर समस्याओं की जड़ में है ।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं खोलने के बात पर कहा कि बिना पॉलिसी लागू किए स्थानांतरण करना ही अवैध है क्योंकि ट्रांसफर के आवेदन मांगे ही नहीं गए हैं और राजस्थान सरकार द्वारा हाई कोर्ट में केविएट लगा कर यह कहा जा रहा हैं कि पारदर्शी, परिशुद्धता से होगे स्थानांतरण तो प्रथम दृष्टया ही स्वयं स्पष्ट है कि माननीय विधायक जी ओर सत्ताधारी पार्टी कार्यकर्ता की इच्छा ट्रांसफर पोस्टिंग में ज्यादा क्यों है ?

*ट्रांसफर प्रमोशन पोस्टिंग में अधिकारियों ,दलाल सक्रिय*

उन्होंने वर्तमान राष्ट्रवादी सोच वाली सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा कि राजस्थान में ट्रांसफर प्रमोशन पोस्टिंग में अधिकारियों द्वारा जिले में खाली पदों को काउंसलिंग व्यवस्था में शामिल नहीं किया जाता हैं ओर यदि गलती से शामिल किया जाता हैं तो पूर्व वाले शिक्षक को पश्चिम,पश्चिम वाले को दक्षिण प्रान्त में,ओर दक्षिण वाले को उत्तर में भेजा जाता हैं अर्थात चारों दुःखी होकर दलाल के मार्फत काम करावे ।एक ओर मोदी नीति कहती है न खाऊंगा नहीं खाने दूंगा किन्तु धृष्ट राष्ट्र की तरह इस सरकार के मुखिया आंखों पर पट्टी बाध कर हरा चश्मा लगा कर बैठे है ताकि उन्हें सभी दूर हरा ही दिखे।

राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के मुख्य संरक्षक एवं प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने प्रदेश में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने तथा प्रदेश में एक पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की पुरजोर मांग की गई है।उन्होंने पे प्रोटेक्शन,तदर्थ बोनस,जर्जर शाला भवन सेफ़्टी आडिट रिपोर्ट सहित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया 

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने 19 जून को आदेश जारी कर राजकीय अधिकारियों- कर्मचारियों के स्थानांतरण से प्रतिबंध हटाया है,लेकिन शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों के स्थानांतरण पर अभी भी प्रतिबंध यथावत लगा हुआ है, जो इन जरूरतमंद शिक्षकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।

प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नवीन कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए एक स्पष्ट एवं पारदर्शी नीति बनाकर सभी ग्रेड के शिक्षकों के स्थानांतरण उसी के आधार पर किये जाएं। 

इस नीति में शिक्षकों से आवेदन मांगने, उनकी छंटनी करने और वरियता के आधार पर स्थानांतरण करने का प्रावधान किया जाए। 

साथ ही विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर अब तक किए जा रहे स्थानांतरणों को बंद किया जाए, क्योंकि इनका कोई स्पष्ट आधार नहीं होता।

 संघ ने यह भी मांग की है कि नव पदोन्नत व्याख्याता जिन्होंने कार्यग्रहण कर लिया है, उन्हें भी स्थानांतरण प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए,क्योंकि इन्हें काउंसलिंग में पर्याप्त रिक्त पदों का अवसर नहीं दिया गया था।

मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री द्वारा कई बार स्थानांतरण नीति बनाने की बात कही गई है तथा भाजपा के घोषणा-पत्र में भी100 दिन में इसका वादा किया गया था, परन्तु आज तक 1000 दिन बाद भी शिक्षा विभाग द्वारा कोई नीति जारी नहीं की गई। 

बिना स्थानांतरण नीति और बिना स्थानांतरण कार्यक्रम जारी किये, किये गये स्थानांतरणों में स्थानांतरण उद्योग पनपने की संभावना रहती है, जिससे योग्य शिक्षक वंचित रह जाते हैं। 

संघ के प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीणा ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त होगा और संघ को लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। 

इस अवसर पर सभा को ललित आर पाटीदार,अशोक शर्मा,नानू राम डामोर,डाया लाल यादव, महिपाल भाटिया, महिपाल भुता,नवीन जोशी, लोकेश पंड्या सहित कई वक्ताओं ने सम्बोधित किया।

 सभा का संचालन लोकेश ने किया जबकि आभार प्रदर्शन बदन लाल डामोर ने ज्ञापित किया।
 


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