यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर आज देशभर सहित उदयपुर में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों में बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की एकदिवसीय हड़ताल पूर्ण रूप से सफल रही। उदयपुर जिले की सभी शाखाओं में कार्य बहिष्कार किया गया, जिससे नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस, लोन डिस्बर्समेंट एवं अन्य शाखा-स्तरीय सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। हड़ताली बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रातः 11 बजे पी एन बी शाखा टाउन हॉल के बाहर बड़ी संख्या में एकत्रित होकर जम कर प्रदर्शन किया व नारेबाजी की जिसमें महिला साथियों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। बैंक कर्मी केंद्र सरकार द्वारा 5 दिवसीय बैंक सप्ताह को लागू नहीं करने के मुद्दे को दो साल से लंबित रखने के विरोध में जबरदस्त आक्रोशित थे। प्रदर्शन का नेतृत्व धर्मवीर भाटिया, निर्मल उपाध्याय, बी एल अग्रवाल, नरेश चावत, पी एस खींची, एम एम शर्मा सुनील दाबल, महेंद्र कोठारी, हेमन्त पालीवाल, विनोद कपूर, मोहन जाखड़,गिरीश कालरा व विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने किया। प्रदर्शन के बाद हुई सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग केंद्र सरकार द्वारा अकारण लंबित रखी जा रही है जिसका कोई औचित्य नहीं है। बैंकों में अत्यधिक स्टाफ की कमी, बढ़ता व्यवसाय भार, निरंतर अनुपालन एवं लक्ष्य दबाव के कारण शारीरिक एवं मानसिक तनाव चरम पर है। साथ ही लगभग 30% महिला कर्मचारी हैं, जिन्हें कार्य-जीवन संतुलन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अन्य सरकारी क्षेत्रों यथा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, RBI, NABARD व बीमा क्षेत्र आदि में पूर्व में ही 5-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू होने के बावजूद बैंकिंग क्षेत्र में यह सुधार लंबित है जिसे बैंककर्मी भेदभावपूर्ण रवैये के रूप में भी देख रहे हैं, और इस वादाखिलाफी के विरुद्ध एक दिन की हड़ताल पर उतरे हैं। फोरम के संयोजक डी के जैन ने बताया कि भारतीय बैंक संघ व यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के मध्य 5 दिवसीय कार्य सप्ताह पर सहमति होकर स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को अनुशंषित किया गया है जिस पर केंद्र सरकार कुंडली मारे बैठी है जिससे बैंककर्मियों के साथ भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है। 2024 में भारतीय बैंक संघ एवं यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच हुए समझौते में भी दैनिक कार्य समय में लगभग 40 मिनट वृद्धि करके सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी। इस समय वृद्धि के एवज में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग पूर्णतया जायज है। उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह किया कि इस मामले पर तुरंत अपनी सहमति दें अन्यथा बैंककर्मियों को लंबे संघर्ष के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।