निम्बाहेड़ा। कल्याण महाकुंभ के तृतीय दिवस शुक्रवार को वेदपीठ पर विराजित कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर श्री कल्लाजी सहित पंचदेवों का 21 महाद्रव्यों से अभिषेक करने के बाद केसरिया रंग में किया गया श्रृंगार भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं सतरंगी फूलों से सजी झांकी ने महोत्सव की शोभा को द्विगुणित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस दौरान ठाकुर श्री को सवा सौ थाल में लगाए गए लड्डुओं के भोग की झांकी अनुपम रही। बड़ी संख्या में कल्याण भक्तों ने ठाकुर जी के अनुपम दर्शन के साथ भोग की झांकी को अनूठी और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि ठाकुर जी का ऐसा ठाठ केवल वेदपीठ पर ही देखने को मिलता है।
खूब जमी भजन संध्या
महाकुंभ के द्वितीय दिवस की रात्रि में श्याम रंगीला मित्र मंडल, शंभूपुरा के लोक भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत भजन संध्या खूब जमी। इसमें गोपाल नामदेव सहित अन्य गायकों ने अपने ही अंदाज में गणपति का आह्वान करते हुए प्रचलित भजन "मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे, राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे" की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान गायकों ने अपने ही अंदाज में मनिहारी का भेष बनाया, सांवरे की महफिल में सांवरा घर आता है तथा खाटूश्याम को रिझाने वाले मनभावन भजनों की प्रस्तुति दी। प्रारंभ में कलाकारों का वेदपीठ की ओर से तुलसी माला और उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया गया।
कलियुग में भगवान सदाशिव की आराधना, सत्य, दान और धर्म का पालन ही मानव जीवन का आधार — स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ
21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत नेमीशरण्यम परिसर स्थित विश्वरूपम कथा मंडपम में भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य परम पूज्य ज्ञानानंद तीर्थ महाराज के श्रीमुख से श्री लिंग महापुराण कथा की ज्ञानगंगा प्रवाहित हो रही है। शुक्रवार को कथा के तृतीय दिवस महाराज श्री ने सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग एवं कलियुग का विस्तार से वर्णन करते हुए चारों युगों की विशेषताओं, धर्म, मानव जीवन तथा भगवान शिव की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। महाराजश्री ने श्री लिंग महापुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि कलियुग में वेद, शास्त्र और धर्म की निंदा करने वालों की संख्या बढ़ेगी। लोग स्वार्थवश एक-दूसरे पर आक्रमण करेंगे तथा सत्य और धर्म का पालन करने वाले लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे समय में भगवान सदाशिव की आराधना, सत्य, दान और धर्म का पालन ही मानव जीवन का सबसे बड़ा आधार है। महाराजश्री ने कहा कि सृष्टि का कालचक्र चार युगों में विभाजित है। सतयुग ज्ञान, सत्य और सात्त्विकता का युग था, त्रेतायुग में रजोगुण की प्रधानता रही, द्वापरयुग में रजोगुण एवं तमोगुण का मिश्रित प्रभाव दिखाई दिया, जबकि कलियुग तमोगुण प्रधान माना गया है। उन्होंने कहा कि सतयुग में ज्ञान सर्वोच्च साधना थी, जबकि कलियुग में दान को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सतयुग में मनुष्य की आयु लगभग एक लाख वर्ष, त्रेतायुग में दस हजार वर्ष, द्वापरयुग में एक हजार वर्ष तथा कलियुग में अधिकतम 125 वर्ष मानी गई है। जैसे-जैसे धर्म के चरण क्षीण होते हैं, वैसे-वैसे मनुष्य की आयु, बल, स्मरण शक्ति और धर्माचरण की क्षमता भी घटती जाती है। महाराजश्री ने कहा कि सतयुग में लोग सत्यवादी, धर्मपरायण और सदाचारी थे। नदियाँ, पर्वत, वनस्पतियाँ और समस्त प्रकृति अपनी मर्यादा में स्थित रहती थीं। वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते, नदियाँ अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि परोपकार की भावना से संचालित होती है। यही सनातन धर्म का संदेश है। समय के साथ त्रेता और द्वापर में धर्म का क्षय प्रारंभ हुआ तथा कलियुग में राग, द्वेष, छल, कपट, लोभ और अधर्म का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। प्रवचन के अंत में महाराजश्री ने भगवान शिव के अष्टमूर्ति स्वरूप पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और यज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि इन सभी स्वरूपों में भगवान शिव का दिव्य निवास है। इनकी उपासना से समस्त सृष्टि का कल्याण होता है और यही श्री लिंग महापुराण का सनातन संदेश है।
अरनी मंथन के साथ पंचदिवसीय 51 कुंडीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ आज से
21वां कल्याण महाकुंभ भगवान शिव को समर्पित है। इसके तहत वेदपीठ की ओर से आयोजित 51 कुंडीय पंचदिवसीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ का भव्य शुभारंभ अरनी मंथन के साथ अग्निदेव को प्रकट कर यज्ञ कुंडों में स्थापित करके किया जाएगा। इसमें 51 युगल यजमान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गौ-घृत से तथा 250 से अधिक साकल्य की आहुति देकर भगवान सदाशिव की कृपा प्राप्ति एवं सर्वत्र अच्छी वर्षा की कामना करेंगे। यज्ञशाला में प्रवेश से पूर्व विधिवत हेमाद्रि स्नान करवाकर यजमानों को निर्धारित कुंड पर विराजित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भवई लोक कलाकार लक्ष्मीनारायण रावल की भक्ति संध्या आज
कल्याण महाकुंभ के चतुर्थ दिवस ठाकुर जी की संध्या महाआरती के बाद कथा मंडप में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त भवई लोक कलाकार लक्ष्मीनारायण रावल एंड पार्टी द्वारा भगवान शिव के साथ ही ठाकुर जी के मनभावन भजनों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। वहीं रावल द्वारा भवई नृत्य के साथ ही सजीव झांकियों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देकर भक्तों को भाव-विभोर किया जाएगा।