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एण्डटीवी के कलाकारों ने विश्व रंगमंच दिवस पर अपने थिएटर से टीवी तक के सफर को किया याद

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23 Mar 26
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एण्डटीवी के कलाकारों ने विश्व रंगमंच दिवस पर अपने थिएटर से टीवी तक के सफर को किया याद

मुंबई: रंगमंच या थिएटर लंबे समय से कई सफल कलाकारों की नींव रहा है, जहाँ उनकी कला, अनुशासन और अभिनय की गहराई को आकार मिलता है। वर्ल्ड थिएटर डे (विश्व रंगमंच दिवस) के अवसर पर एण्डटीवी के उन कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए, जिन्होंने थिएटर से लेकर टेलीविज़न तक का सफर तय किया है। उन्होंने बताया कि किस तरह मंच ने उन्हें अभिनय के लिए तैयार किया, उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आज भी थिएटर उनके काम को कैसे प्रभावित करता है। इन कलाकारों में बृज भूषण शुक्ला (‘घरवाली पेड़वाली‘ के सुरेश पांडे) और आसिफ शेख (‘भाबीजी घर पर हैं 2.0‘ के विभूति नारायण मिश्रा) शामिल हैं।
बृज भूषण शुक्ला, जो ‘घरवाली पेड़वाली‘ में सुरेश पांडे की भूमिका निभा रहे हैं, कहते हैं, “मेरे अभिनय का सफर रंगमंच से शुरू हुआ, जहाँ मैंने सच में एक किरदार को जीना सीखा। थिएटर आपको अनुशासन, टाइमिंग और दर्शकों से सीधे जुड़ने की कला सिखाता है। यहाँ कोई दूसरा मौका नहीं होता, हर प्रस्तुति बिल्कुल वास्तविक और तुरंत होती है। जब मैंने टेलीविज़न की ओर रुख किया, तो कैमरा एंगल और रीटेक जैसी तकनीकी चीजों के साथ खुद को ढालना पड़ा, जो एक अलग अनुभव था। लेकिन, थिएटर से मिली बुनियाद-खासकर अभिव्यक्ति, आवाज पर नियंत्रण और सहजता-मेरे लिए बेहद मूल्यवान रही है। ‘घरवाली पेड़वाली‘ में मैं अपने किरदार में वही सच्चाई और ऊर्जा लाने की कोशिश करता हूँ। थिएटर हमेशा मेरा पहला गुरु रहेगा और हर भूमिका में मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।” 
आसिफ शेख, जो ‘भाबीजी घर पर हैं 2.0‘ में विभूति नारायण मिश्रा के किरदार के लिए जाने जाते हैं, कहते हैं, “थिएटर ने मुझे एक कलाकार के रूप में गढ़ने में बेहद अहम् भूमिका निभाई है। यहीं मैंने अभिनय की बारीकियाँ सीखी, चाहे वह बॉडी लैंग्वेज हो, आवाज़ का उतार-चढ़ाव हो या फिर खासकर कॉमेडी में टाइमिंग। लाइव दर्शकों के सामने प्रदर्शन करना एक अलग ही एनर्जी देता है और आपको तेज, लचीला और आत्मविश्वासी बनाता है। जब मैं टेलीविज़न में आया, तो समझ में आया कि यह माध्यम थोड़े नियंत्रित और सूक्ष्म अभिनय की माँग करता है, लेकिन अभिनय की मूल भावना वही रहती है। थिएटर की पृष्ठभूमि मुझे अपने प्रदर्शन में गहराई और सहजता लाने में मदद करती है, खासकर कॉमेडी में, जहाँ टाइमिंग सबसे महत्वपूर्ण होती है। आज भी मैं थिएटर से मिली सीख को अपने साथ रखता हूँ और मानता हूँ कि यही अभिनय का सबसे शुद्ध रूप है, जो मुझे हर दिन प्रेरित करता है।”

एण्डटीवी पर हर सोमवार से शुक्रवार भरपूर मनोरंजन का आनंद उठाना न भूलें, देखिए ‘घरवाली पेड़वाली‘ रात 10:00 बजे और ‘भाबीजी घर पर हैं 2.0‘ रात 10:30 बजे। सभी एपिसोड्स आप कभी-भी हिंदी ज़ी5 पर भी देख सकते हैं।


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