गुलाबी नगरी जयपुर के निवासियों को पहली बार सेना दिवस पर 15 जनवरी को भारतीय सेना की शक्ति, अनुशासन और आधुनिक स्वरूप को इतने निकट से देखने का अवसर मिलने वाला है।जो न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।अब तक सेना दिवस की परेड मुख्यतः दिल्ली या सैन्य छावनी क्षेत्रों तक सीमित रही थी, लेकिन जयपुर में इसे नागरिक क्षेत्र में आयोजित करने का निर्णय भारतीय सेना की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें वह जनता से सीधा संवाद और जुड़ाव बढ़ाना चाहती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जिला प्रशासन और पुलिस महकमा इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य और सफल बनाने में जुट हुआ है। इस अवसर पर प्रदेश की कला और संस्कृति का बेजोड़ प्रदर्शन भी किया जायेगा।
भारत की सैन्य परंपराओं में 15 जनवरी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन 1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभाला था। तब से हर वर्ष यह दिन सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह आयोजन इसलिए ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि सेना दिवस की भव्य परेड पहली बार जयपुर में आयोजित की गई।
जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र की महल रोड पर आयोजित इस परेड ने सेना और आम नागरिकों के बीच की दूरी को प्रतीकात्मक रूप से कम किया। सड़कों के दोनों ओर खड़े हजारों नागरिकों ने सेना के जवानों का उत्साहवर्धन किया, तिरंगे के रंग में रंगी यह सुबह देशभक्ति के भाव से ओत-प्रोत रही। सेना दिवस परेड का मुख्य आकर्षण सेना की विभिन्न टुकड़ियों का अनुशासित मार्च-पास्ट रहा। पैदल सेना, मैकेनाइज्ड यूनिट, सिग्नल्स, इंजीनियर्स और अन्य कोर की टुकड़ियों ने कदम से कदम मिलाकर परेड की, जिससे सेना की एकता और समन्वय का शानदार प्रदर्शन हुआ। सैन्य बैंड की देशभक्ति धुनों ने वातावरण को और भी जोशीला बना दिया। आधुनिक हथियार प्रणालियों, सैन्य वाहनों और तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि भारतीय सेना निरंतर आधुनिकरण की राह पर अग्रसर है।
हवाई प्रदर्शन भी इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों व विमानों के फ्लाय-पास्ट ने आसमान में शक्ति और साहस की नई रेखाएँ खींच दीं। आधुनिक युद्धक क्षमता, निगरानी प्रणालियों और स्वदेशी रक्षा उपकरणों की झलक ने दर्शकों को यह भरोसा दिलाया कि देश की सीमाएँ सुरक्षित हाथों में हैं। यह प्रदर्शन केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रक्षा तैयारियों का संदेश भी था।
जयपुर में सेना दिवस परेड का आयोजन राजस्थान के लिए भी विशेष महत्व रखता है। क्योंकि
राजस्थान की सीमाएँ देश की सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और यहां के युवाओं का सेना में योगदान सदैव उल्लेखनीय रहा है। इस परेड ने राज्य के युवाओं में देशसेवा के प्रति नई प्रेरणा जगाई है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और युवा परेड देखने पहुंचे, जिनकी आंखों में सेना की वर्दी पहनने का सपना साफ झलक रहा था।
यह आयोजन केवल एक सैन्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश भी लेकर आया। परेड के दौरान ‘नो योर आर्मी’ जैसी गतिविधियों और प्रदर्शनों के माध्यम से आम नागरिकों को सेना के जीवन, प्रशिक्षण और बलिदानों से परिचित कराया गया। इससे सेना के प्रति सम्मान और समझ दोनों में वृद्धि हुई। साथ ही, नागरिक प्रशासन और सेना के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण भी सामने आया, जिसने बड़े सार्वजनिक आयोजनों के सफल आयोजन की क्षमता को सिद्ध किया।
सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अनुशासन की दृष्टि से भी यह आयोजन उल्लेखनीय रहा। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो। नागरिकों की भागीदारी और अनुशासन ने यह दिखाया कि जब देशभक्ति और जिम्मेदारी साथ-साथ चलती हैं, तो किसी भी बड़े आयोजन को सफल बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, जयपुर में पहली बार आयोजित सेना दिवस परेड केवल एक परंपरा का विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय सेना के जन-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह आयोजन देशवासियों को सेना के और करीब लाने, युवाओं को प्रेरित करने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। गुलाबी नगरी की सड़कों पर गूंजे सेना के कदमों की यह गूंज लंबे समय तक लोगों के मन में देशभक्ति की ऊर्जा भरती रहेगी।