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“छोरा मेवाड़ी, सबसे अगाड़ी” से सजेगा कहानियों का संसार

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08 Jan 26
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“छोरा मेवाड़ी, सबसे अगाड़ी” से सजेगा कहानियों का संसार

 

उदयपुर।क्या कहानियाँ सचमुच जीवन बदल सकती हैं? उदयपुर टेल्स स्टोरी टेलिंग महोत्सव का सातवाँ संस्करण इसी प्रश्न का सजीव उत्तर लेकर आज से शुरू हो रहा है। शिल्पग्राम रोड स्थित पार्क एक्जोटिका रिसोर्ट में तीन दिनों तक कल्पना, संवेदना, रहस्य, संगीत और हास्य से भरा एक ऐसा संसार रचेगा, जहाँ अनसुनी–अनकही कहानियाँ श्रोताओं के मन में नई प्रेरणा जगाएँगी।

इस कहानी-यात्रा की पहली कड़ी है—विलास जानवे और किरण जानवे की रोचक प्रस्तुति “छोरा मेवाड़ी, सबसे अगाड़ी”। एक फुर्तीले, बहुमुखी, चंचल और बुद्धिमान बालक के माध्यम से यह कहानी साहस, मानवता, स्वस्थ जीवनशैली, मोबाइल की लत से मुक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को बेहद सहज और मनोरंजक ढंग से उकेरती है। रहस्य, रोमांच, संगीत और हास्य से सजी यह कथा बच्चों के लिए जितनी आकर्षक है, उतनी ही उन बड़ों के लिए भी—जो कुछ देर फिर से बच्चा बनना चाहते हैं।

उदयपुर टेल्स से शुरू से जुड़े वरिष्ठ रंगकर्मी विलास जानवे और किरण जानवे नाटक और मूकाभिनय (माइम)—दोनों विधाओं में निपुण हैं। देश के अनेक राष्ट्रीय माइम महोत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके ये कलाकार बच्चों से विशेष लगाव रखते हैं। विलास जानवे को वर्ष 2021 में रंगमंच और मूकाभिनय के क्षेत्र में संगीत नाटक अकादमी सम्मान भारत की महामहिम राष्ट्रपति से प्राप्त हो चुका है। मंच पर कहानी से पहले शंखनाद—किसी शुभ कार्य का संकेत—और फिर कथा की शुरुआत, यह प्रस्तुति को और भी स्मरणीय बनाता है।

मां माय एंकर फाउंडेशन की संस्थापक सुष्मिता सिंघा बताती हैं कि यह मंच इसलिए रचा गया है ताकि देश–विदेश के ख्यातनाम स्टोरी टेलर्स अपनी ऐसी सच्ची और काल्पनिक कहानियाँ साझा कर सकें, जिन्हें आमजन ने पहले कभी न सुना हो। प्रस्तुतिकरण ऐसा होगा मानो घटनाएँ उसी क्षण घट रही हों—और यही कहानियों की शक्ति है, जो मनुष्य को भीतर से बदल देती है।

उदयपुर टेल्स के सह-संस्थापक सलिल भंडारी के अनुसार, 9 से 11 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में श्रोताओं को देश–विदेश के प्रसिद्ध स्टोरी टेलर्स और बॉलीवुड कलाकारों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
9 जनवरी, प्रातः 10 बजे बच्चों के लिए “छोरा मेवाड़ी, सबसे अगाड़ी” के बाद गौरी नीलकांतन की काल्पनिक कहानी जादुई बीमारी और राजेश शिंदे की संगीतमय लोककथा संकोची असुर और उल्लाल की शेरनी प्रस्तुत होंगी।
शाम 5:30 बजे से मयूर कलबाग की रहस्यमय कथा अघोरी, अफ्रीकी लोकगीत आकाश के नीचे, बॉलीवुड कलाकार दिव्य निधि शर्मा की समकालीन कहानी जीवन, राजित कपूर का व्यंग्यात्मक नाटक कचरे की हिफाज़त और मजनू, तथा संजुक्ता सिन्हा डांस कंपनी की शास्त्रीय फ्यूजन नृत्य प्रस्तुति बदलती रेत दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी।

शंखनाद के साथ आज से जुड़ रहा है कहानियों का यह संसार—जहाँ शब्द सिर्फ सुनाई नहीं देते, बल्कि जीवन में उतरकर दिशा देते हैं। उदयपुर टेल्स एक बार फिर साबित करेगा कि सही ढंग से कही गई कहानी, किसी भी मन को बदलने की ताकत रखती है।


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