नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य मिशन मोड में शुरू किया गया है। अब तकए ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.4 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। शेष नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य जारी है। 2014-25 के दौरान और उससे पहले किए गए विद्युतीकरण का कार्य किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2014 से पहले (लगभग 60 वर्ष) 21,801 किलोमीटर किया गया। वर्ष 2014-25 में 46,900 किलोमीटर तथा क्षेत्रवार विद्युतीकरण की स्थिति मध्य रेलवे 100 प्रतिशत। इसी प्रकार पूर्वी तटीय रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पूर्वी रेलवे, कोंकण रेलवे, कोलकाता मेट्रो, उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर पूर्वी रेलवे, उत्तरी रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्वी रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे 100 प्रतिशत का कार्य किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 99 प्रतिशत, दक्षिण पश्चिमी रेलवे में 96 प्रतिशत तथा दक्षिण रेलवे में 98 प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य किया गया है।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विद्युतीकरण की स्थिति आंध्र प्रदेश 100 प्रतिशत। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, पंजाब, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल में 100 प्रतिशत का कार्य किया गया। राजस्थान 99 प्रतिशत, असम 98 प्रतिशत, तमिलनाडु व कर्नाटक 97 प्रतिशत, गोवा 91 प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य किया गया है। सभी नई रेल लाइन/मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को विद्युतीकरण के साथ स्वीकृत और निर्मित किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान, तमिलनाडु सहित रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं पर 29,826 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 2023-24 से जनवरी 2026 तक 10,932 किलोमीटर रेल का विद्युतीकरण किया जा चुका है।
विद्युतीकरण परियोजनाओं का पूरा होना कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वन संबंधी मंजूरी, अतिक्रमण करने वाली उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, क्षेत्र की भौगोलिक और स्थलाकृतिक स्थिति, परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति, जलवायु परिस्थितियों के कारण किसी विशेष परियोजना स्थल के लिए एक वर्ष में कार्य महीनों की संख्या आदि। ये सभी कारक परियोजनाओं के पूरा होने के समय को प्रभावित करते हैं। विद्युतीकरण के चलते भारतीय रेलगाड़ियों में डीजल की खपत में कमी आई है। भारतीय रेलगाड़ी ने 2016-17 की तुलना में 2024-25 में डीजल की खपत में 178 करोड़ लीटर की बचत की है, जो 62 प्रतिशत की बचत है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है। भारतीय रेलगाड़ी ने 2024-25 के दौरान कुल ऊर्जा खपत पर 32,378 करोड़ रुपये खर्च किए।
उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी वर्ष 2024-25 में वर्ष 2023-24 की तुलना में 75,492 किलो लीटर डीज़ल की बचत हुए है जिससे इस मद में लगभग 691 करोड़ रुपए का व्यय कम हुआ है। भारतीय रेलगाड़ी द्वारा इलेक्ट्रिक और डीजल इंजनों के रखरखाव पर खर्च की गई राशि का विवरण भारतीय रेलगाड़ी के वार्षिक सांख्यिकी विवरण में उपलब्ध है, जो भारतीय रेलगाड़ी की वेबसाइट (https://indianrailways.gov.in) पर उपलब्ध है। रेलवे पर्यावरण और लागत संबंधी चिंताओं के कारण इलेक्ट्रिक इंजनों की ओर अग्रसर है। हालांकि बायो-डीजल पर परीक्षण किए जा चुके हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन बायो-डीजल की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी हैं।
अपशिष्ट प्रबंधन
भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों, खानपान इकाइयों और डिब्बों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन और निपटान को यात्रियों के बेहतर अनुभव के लिए उच्च प्राथमिकता दी जाती है। इस संबंध में उठाए गए विभिन्न कदम इस प्रकार हैं, ट्रेनों के अंदर एकत्रित अपशिष्ट का निपटान निर्धारित स्टेशनों पर किया जाता हैए जिन्हें अपशिष्ट निपटान के लिए चिन्हित किया गया है। ट्रेन के सफाई कर्मचारियों को पटरियों पर कूड़ा न फेंकने का सख्त निर्देश दिया गया है और उल्लंघन करने पर कठोर दंड लगाया जाता है, स्वच्छता बनाए रखने के लिए रेलवे पटरियों के किनारे कूड़ा-कचरा उठाया जाता है, आवश्यकतानुसार स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें ;पीबीसीएमद्ध स्थापित की गई हैं, जैव-अपघटनीय और अजैविक अपशिष्ट को स्रोत पर ही अलग करने के लिए विभिन्न स्टेशनों पर दो प्रकार के कूड़ेदान लगाए गए हैं, स्थानीय परिस्थितियों, व्यवहार्यता और आवश्यकता के आधार पर, अपशिष्ट निपटान के लिए स्थानीय रेलवे अधिकारियों और नगर निकायों के बीच समझौते किए गए हैं, भारतीय रेलवे के अनेक स्थानों पर आवश्यकतानुसार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) जैसी अवसंरचनाएं स्थापित और चालू की गई हैं। भारतीय रेलवे में यात्रियों को ट्रेनों में उपलब्ध कूड़ेदानों में कूड़ा डालने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नियमित रूप से जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, मंडलए क्षेत्रीय और मुख्यालय स्तर पर पर्यवेक्षकों/वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित/अचानक निरीक्षण किए जाते हैं, स्वच्छता मानकों में महत्वपूर्ण और स्थायी सुधार लाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत विशेष स्वच्छता अभियान और स्वच्छता अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, यात्री डिब्बों में बायो-टॉयलेट लगाकर ट्रेनों से मानव मल के सीधे निर्वहन को समाप्त किया गया है।
बायो-टॉयलेट की व्यवस्था का विवरण की गई है, जो इस प्रकार है बायो-टॉयलेट की संख्या (अवधि) 2004-14 रूपये 9,587 तथा 2014 से अब तक रूपये 3,61,572 है।
यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।