गोपेन्द्र नाथ भट्ट
पर्यटन के मशहूर सर्किट के नजरिए से दिल्ली- जयपुर-आगरा ट्राई एंगल आज भी अपने परवान पर है। इस सर्किट पर भारत में आने वाला हर तीसरा विदेशी पर्यटक यात्रा करता हैं। इस सर्किट को और अधिक गतिमान बनाने तथा राजस्थान पर्यटन को नई गति देने की दिशा में और भी प्रयास जरूरी है। यदि राजस्थान रोडवेज की वोल्वो बसों का संचालन बीकानेर हाउस, नई दिल्ली से पुनः शुरू किया जाता है, तो यह कदम प्रदेश के पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राजधानी नई दिल्ली से देश-विदेश के पर्यटकों का सीधा संपर्क बिंदु माने जाने वाले बीकानेर हाउस को परिवहन हब के रूप में विकसित करना, राजस्थान के लिए एक पर्यटन रणनीतिक लाभ का सौदा साबित हो सकता है। पिछले 6- 7 वर्ष पूर्व तक बीकानेर हाऊस से राउंड द क्लॉक राजस्थान रोडवेज की वॉल्वो बसे चलती थी, जिससे राजस्थान रोडवेज को भी बहुत अधिक आर्थिक लाभ हो रहा था। साथ ही बीकानेर हाऊस में सरस डेयरी के दुग्ध उत्पादों लस्सी श्रीखंड ,ऊंटनी का दूध आदि की भी खासी बिक्री होने से राजस्थान डेयरी को भी काफी लाभ हो रहा था तथा सरस के उत्पाद राजधानी क्षेत्र दिल्ली में खासे लोकप्रिय हो रहे थे लेकिन कतिपय कारणों से बन्द हुई रोडवेज वोल्वो बसों के कारण इन दोनों संस्थाओं राजस्थान रोडवेज एवं राजस्थान डेयरी को नुकसान हुआ है। साथ ही राजस्थान के पर्यटन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बीकानेर हाऊस के नजदीक ही नई दिल्ली के पृथ्वीराज रोड स्थित राजस्थान हाऊस में ठहरने वाले माननीयों के लिए भी ये सेवाएं सोने में सुहागा जैसी थी। बीकानेर हाउस से चलने वाली राजस्थान रोडवेज की वोल्वो बसे तो पिछले कई वर्षों से बंद है जबकि निकटवर्ती मंडी हाउस से हिमाचल प्रदेश रोडवेज की बसे शिमला आदि गंतव्य स्थलों के लिए आज भी बदस्तूर चल रही है।
राजस्थान रोडवेज की लग्जरी वोल्वो बसों का वर्तमान में संचालन बीकानेर हाउस से काफी दूर आईएसबीटी कश्मीरी गेट से हो रहा है, जहां भारी भीड़ में बसों का अस्तित्व ही खो गया है। साथ ही आईएसबीटी ने यात्री सुविधाओं का भी समुचित इंतजाम नहीं हैं। इससे पर्यटकों को कई अपेक्षित सुविधाओं से मरहूम होना पड़ रहा है। दूसरी ओर राजस्थान रोडवेज की लग्जरी वोल्वो बसों का धौला कुंआ पर होने वाले स्टॉप पर भी न तो टॉयलेट्स है, नही धूप, वर्षा और ठंड से बचने के लिए किसी शेड की ही कोई व्यवस्था है। कश्मीरी गेट से कई बार यात्रियों के अभाव में राजस्थान की वॉल्वो बसे कैंसल हो जाती है अथवा मामूली सवारियों के साथ उन्हें चलाने की मजबूरी है। इन बसों का कश्मीरी गेट से धौला कुंआ तक आने का समय भी तय नहीं है। कभी तो यात्रियों को इन बसों का ढ़ाई तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है तो कभी ये निर्धारित समय से पहले भी आ जाती है क्योंकि दिल्ली के ट्रेफिक जाम के बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। ऐसी दुर्व्यवस्था में राजस्थान रोडवेज की वोल्वो बसों की संख्या पहले के मुकाबले बहुत कम हो गई है तथा आर्थिक दृष्टि से ये बसे सफेद हाथी की तरह राज्य सरकार पर बोझ बन कर रह गई है। इन वॉल्वो बसों में यात्रियों को पहले निःशुल्क बिसलरी दी जाती थी लेकिन कोरोना के बाद से उसे भी बन्द कर दिया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी रहते है। उसके अलावा काफी संख्या में पर्यटक राजस्थान विशेष कर जयपुर की यात्रा पर जाना चाहते है। ऐसे में उनकी मांग है कि राजस्थान रोडवेज की वोल्वो बसों की सेवाएं फिर से बीकानेर हाउस से शुरू की जाए, जहां रोडवेज का एक ऑफिस भी है जोकि अब खस्ता हालत होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रदूषण फैलने की आशंका में इन बसी को बन्द किया गया है तो दिल्ली की सीमा तक सीएनजी अथवा इलेक्ट्रिक बसे इस समस्या का विकल्प हो सकता हैं।
बीकानेर हाउस लंबे समय से राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां पर्यटन विभाग और अन्य संस्थाओं द्वारकसांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और विभिन्न मेलों आदि का आयोजन होता है। यदि यहीं से जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, चितौड़गढ़,बीकानेर, जैसलमेर, कोटा, सवाई माधोपुर, अजमेर , भरतपुर और माउंट आबू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए लक्जरी वोल्वो बस सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो पर्यटकों को एक ही स्थान से सुरक्षित, आरामदायक और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली देश का सबसे बड़ा पर्यटन गेटवे है। विदेशी पर्यटक अक्सर दिल्ली पहुंचकर राजस्थान की यात्रा की योजना बनाते हैं। ऐसे में हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन से अलग, बीकानेर हाउस जैसा समर्पित राजस्थान केंद्र यदि सीधी बस सेवाओं से जुड़ता है, तो यह “वन-स्टॉप राजस्थान टूरिज्म कनेक्ट” की तरह काम कर सकता है। इससे निजी टैक्सी निर्भरता कम होगी और राज्य परिवहन को सीधा लाभ मिलेगा।
राजस्थान रोडवेज के लिए भी यह पहल राजस्व और छवि दोनों लिहाज से अहम हो सकती है। वोल्वो बसें पहले से ही आराम, सुरक्षा और समयबद्धता के लिए जानी जाती हैं। यदि इन बसों का समयबद्ध संचालन, ऑनलाइन बुकिंग और पर्यटन पैकेजों से संयोजन किया जाए, तो यह सेवा न केवल पर्यटकों बल्कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले राजस्थान मूल के लोगों के लिए भी आकर्षक का केन्द्र बन सकती है।
पर्यटन विकास की दृष्टि से इसका एक बड़ा लाभ यह होगा कि राजस्थान के कम लोकप्रिय, लेसर नॉन लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थलों जैसे ब्रज से जुड़े अंचल, शेखावाटी, हाड़ौती और सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्रों को भी मुख्य पर्यटन मानचित्र से जोड़ा जा सकेगा। इससे पर्यटन का दबाव केवल जयपुर- जोधपुर-उदयपुर आदि शहरों तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में फैलेगा और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।हालांकि इस प्रस्ताव को सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। बीकानेर हाउस परिसर में यातायात प्रबंधन, पार्किंग, यात्रियों की सुविधाएं, टिकट काउंटर और सूचना केंद्र आदि को सुव्यवस्थित करना जरूरी होगा। इसके साथ ही केंद्र और राज्य स्तर पर प्रशासनिक समन्वय भी अहम रहेगा। कुल मिलाकर, बीकानेर हाउस से राजस्थान रोडवेज की वोल्वो बसों का संचालन केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और आर्थिक गतिविधियों को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी बन सकती है। यदि राजस्थान सरकार द्वारा इसे सुनियोजित तरीके से लागू किया गया, तो यह पहल राजस्थान को दिल्ली से सीधे जोड़ते हुए पर्यटन विकास में एक सहयोगी और प्रभावी कदम साबित हो सकती है।