उदयपुर। केंद्र सरकार वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहु-स्तरीय कार्ययोजनाएं लागू कर रही है। औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण, निर्माण गतिविधियों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एनसीएपी के अंतर्गत किए गए प्रयासों से कई शहरों में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया की ओर से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत वायु गुणवत्ता प्रबंधन के संबध में राज्य सभा में पूछे गये अतारांकित प्रश्न के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने यह जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 130 शहरों की पहचान की गई है जहां वायु गुणवत्ता मानक पूरे नहीं हो रहे थे। इन शहरों में स्रोत विशेष कार्य योजनाओं के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष 2023 से 2025 के बीच कई शहरों में गंभीर वायु गुणवत्ता ( मानक 400) दर्ज की गई। दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों में सबसे अधिक खराब वायु गुणवत्ता वाले दिन दर्ज हुए।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण प्रदूषण कटौती के परिणाम अच्छे रहे। 103 शहरों में 10 सांद्रता में कमी दर्ज की गई है। 64 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 25 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक कमी आई है। 22 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानक को पूरा किया है।
सरकार के प्रयासों से लगभग 7,000 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीएमईएस) स्थापित की गई। 2023-25 के दौरान 412 इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 252 इकाइयों मानकों का पालन नहीं कर रही थीं। उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर बंद करने के आदेश, कारण बताओ नोटिस और अन्य कानूनी कार्रवाई की गई।
दिल्ली-एनसीआर में 315 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के आदेश जारी किए वाहन उत्सर्जन नियंत्रण हेतु 85-6 मानकों को लागू किया गया और पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाए गए। राष्ट्रीय, राज्य और नगर स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। एक केंद्रीकृत वेब पोर्टल के माध्यम से प्रगति की निगरानी की जा रही है दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग स्थापित किया गया है।