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सतत बाल साहित्य साधना के लिए डॉ. विमला भंडारी को बस्ती (उत्तर प्रदेश) में मिला सम्मान

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06 Apr 26
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सतत बाल साहित्य साधना के लिए डॉ. विमला भंडारी को बस्ती (उत्तर प्रदेश) में मिला सम्मान

उदयपुर। नव किरण साधना अलंकरण 2026 से देश के 11 साहित्यकारो को पुरस्कृत किया गया। देश के विभिन्न प्रांतो के 11 सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को 5 अप्रैल रविवार को उनके साहित्य साधना एवं चयनित कृतियों के लिए बस्ती (उत्तर प्रदेश) में पुरस्कृत किया गया। अलंकरण समारोह में डॉ. विमला भंडारी, सलूंबर (राजस्थान) को सतत श्रेष्ठ बाल साहित्य साधना के लिए स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, अंगवस्त्र एवं पुरस्कार राशि 5100 रुपये अर्पित की गई।
अखिल भारतीय नवकिरण साहित्य साधना ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि द्वारा रविवार शाम को अर्श फैमिली रेस्टोरेंट, पटल चौराहा, बस्ती में आयोजित एक भव्य आयोजन में देश के 11 रचनाकारों को अलंकृत किया गया। साथ ही आठ पुस्तकों का लोकार्पण एवं संगोष्ठी हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजमाता आशिमा सिंह, डॉ. विमला भंडारी, हरीश देव दरवेश, अंकुर वर्मा, डॉ. डी के गुप्ता, योगेश शुक्ला उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व गृह सचिव, उत्तर प्रदेश शासन एवं साहित्यकार डॉ. राकेश चंद्रा ने की। संगोष्ठी में डॉ. विमला भंडारी की 49 वीं पुस्तक पिक्चर बुक, शांतिदूत गुटर-गूं का लोकार्पण हुआ। लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव की सात पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। अपने उद्बोधन में विमल भंडारी ने कहा कि हम डिजिटल युग से अब स्मार्ट युग में प्रवेश कर चुके हैं। आज का लेखक और पाठक दोनों स्मार्ट हो गए हैं। सोशल साइट ने हिन्दी साहित्य को विस्तार दिया है और उसकी पहुंच बढ़ाई है। नए और त्वरित प्रकाशन के अवसर दिए हैं उनका पाठक समुदाय भी विस्तृत हुआ है। इससे पूर्व डॉ. विमला भंडारी साहित्य अकादमी राजस्थान साहित्य अकादमी राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य परिषद से पुरस्कृत हो चुकी हैं। वे राजस्थान साहित्य अकादमी की पूर्व सदस्य रही है। पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी की संस्थापक सदस्य रही है। उनकी लिखी बाल साहित्य की कई पुस्तकों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनकी लिखी कहानी पाठ्यक्रम में सम्मिलित है। मध्य प्रदेश साक्षरता अभियान एवं हरियाणा साक्षरता अभियान में उनकी लिखी पुस्तके सम्मिलित हैं। डिजिटल लाइब्रेरी में भी उनकी पुस्तकें उपलब्ध है। बाल साहित्य की पुस्तकों पर अब तक कई शोध हो चुके हैं। सलिला संस्था से जुड़ी विमला भंडारी अब तक 17 राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन करवा चुकी हैं। बाल साहित्य की आठ के संपादित कर चुकी हैं।


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