भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, उत्तरदायी संरक्षकत्व और परोपकार की भूमिका पर केंद्रित विशेष संवाद 'द लेगेसी ऑफ मेवाड़ : विरासत संरक्षण, परंपरा, नेतृत्व और परोपकार' का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं नेटवर्किंग सत्र से हुई, जिसके बाद द चैंबर्स, मुंबई की ओर से स्वागत उद्बोधन के माध्यम से कार्यक्रम की थीम प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात मेवाड़ राजघराने के 77वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ तथा वॉटरफील्ड एडवाइजर्स की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री सौम्या राजन का परिचय कराया गया।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन, उदयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि इस अवसर पर मेवाड़ राजवंश की 1,500 वर्षों से अधिक पुरानी विरासत, उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर तथा महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के संरक्षण कार्यों पर आधारित एक प्रेरक फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद सुश्री सौम्या राजन द्वारा संचालित संवाद में मेवाड़ राजघराने की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण, सतत पर्यटन, विरासत प्रबंधन तथा परोपकार, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और निजी पूंजी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ तथा सुश्री सौम्या राजन ने भारत की जीवंत विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
संवाद के दौरान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि विरासत किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर है, जिसकी रक्षा और संवर्धन वर्तमान पीढ़ी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने रेखांकित किया कि संरक्षण केवल स्मारकों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और सामुदायिक स्मृतियों को जीवित रखने का सतत प्रयास है।
इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित अतिथियों ने विरासत संरक्षण, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विविध विषयों पर अपने प्रश्न रखे। इस अवसर पर आईएचसीएल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत चटवाल, हिंदुजा समूह के वरिष्ठ सलाहकार पॉल अब्राहम, एजेडबी पार्टनर्स के संस्थापक बहराम वकील, टाटा रियल्टी के उदय नारायण, मुम्बई से देबास्मिता पाणी, मिराए एसेट मेनेजमेंट के स्वरूप मोहंती, मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन की सुनीता अग्रवाल, यूएनडीपी इण्डिया के अमराह अशरफ व एंजेला लुसिगी, कुशाग्र इनोवेशन फाउंडेशन की जिगिशा म्हस्कर व आलोक गोगटे, नेचरफ्यूचर के डिपल वोरा दमानिया, स्ट्रैटजी लीड दासरा के श्रेया शोम सहित विभिन्न कॉर्पोरेट, सामाजिक एवं परोपकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सरकार, निजी क्षेत्र, परोपकारी संस्थाओं और समाज के सामूहिक सहयोग की आवश्यकता है। इसके पश्चात आयोजित नेटवर्किंग सत्र में अतिथियों ने दोनों वक्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया।।