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त्वरित टिप्पणी:राजस्थान के बजट में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस 

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14 Feb 26
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त्वरित टिप्पणी:राजस्थान के बजट में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस 

शिक्षा के हब माने जाने वाले राजस्थान के कोटा  में  युवाओं में बढ़ती आत्म हत्या की प्रवृत्ति तथा सामाजिक विषमताओं  एवं  समस्याओं के वर्तमान दौर में राजस्थान सरकार आमजन के मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रख रही है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में 5.51 करोड़़ रोगियों का उपचार किया गया। बजट में भी मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस किया गया है। सभी के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण मानसिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए राज ममता प्रोग्राम चलाया जाएगा जिससे अवसाद, चिन्ता और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। इस प्रोग्राम के तहत एसएमएस मेडिकल कॉलेज में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ’ की स्थापना की जाएगी। साथ ही, जिला मुख्यालयों पर भी ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल’ और जिला चिकित्सालयों पर मनोचिकित्सक के साथ साइकोलॉजिकल काउंसलर की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में स्ट्रेस कम मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और अवेयरनेस सेशन्स भी आयोजित करवाए जाएंगे।

 

भजनलाल सरकार प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण एवं आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य बजट 2026-27 में स्वास्थ्य कल्याण के क्षेत्र में 32 हजार 526 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2023-24 से 53 प्रतिशत अधिक है। यह राज्य सरकार की ‘निरोगी एवं स्वस्थ राजस्थान’ की अवधारणा को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट में चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार, डिजिटल नवाचार, मानसिक स्वास्थ्य, निःशुल्क उपचार सहित विभिन्न क्षेत्रों पर फोकस कर उल्लेखनीय पहल की गई है।

राज्य सरकार द्वारा आरजीएचएस योजना, आयुष्मान वय वंदन योजना, मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान (दवा) योजना जैसी योजनाएं संचालित हैं, जो प्रदेश के प्रत्येक वर्ग को चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं। राजस्थान डिजीटल स्वास्थ्य मिशन तथा आयुष्मान भारत डिजीटल मिशन के अंतर्गत 6.52करोड़ आभा आई.डी. जारी की गई हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित हुई है। चिकित्सकीय क्षेत्र में नवाचारों के तहत ई-संजीवनी टेलीमेडिसन के माध्यम से 20.33 लाख मरीजों को परामर्श दिया गया। राज्य सरकार की मंशा है कि प्रदेशवासियों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाए। इसके तहत इस बार के बजट में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 12 हजार 195 करोड़ रुपये,राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 4 हजार 853 करोड़, परिवार कल्याण विभाग को एक हजार 798 करोड़, चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग को 2 हजार 995करोड़, आयुष के लिए 787.67 करोड़ तथा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण सहित कुल 32 हजार 526 करोड़ रुपये राज्य की चिकित्सकीय सुविधाओं के विस्तार पर व्यय किया जाएगा। 

 

बजट घोषणा के अनुसार  जयपुर के मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय सुविधाओं के उन्नयन के लिए 865 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सशक्त इमरर्जेंसी रेस्पॉन्स सिस्टम विकसित करते हुए शिशु मृत्यु दर को कम किया जाए। इस हेतु बच्चों को इलाज की बेहतर सुविधाओं के लिए जे.के.लोन अस्पताल में 500 बेड क्षमता के आईपीडी टॉवर की स्थापना की जाएगी। साथ ही, हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त आरयूएचएस हॉस्पिटल में 200 बेड का पीडियाट्रिक आईपीडी मय निओनेटल आईसीयू भी विकसित किया जाएगा।

इस वर्ष के बजट में प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बजट में जोधपुर चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 461 करोड़ रुपये, उदयपुर चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 333 करोड़, कोटा चिकित्सा महाविद्यालय 341 करोड़, अजमेर चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 345करोड़, बीकानेर चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 276 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इससे इन कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, क्रिटिकल केयर तथा एमसीएच (ट्रोमा सर्जरी) के सुपर स्पेश्यलिटी कोर्स, अत्याधुनिक विश्राम गृह तथा स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता संवर्धन के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना सहित विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।राज्य सरकार प्रदेश के हर कोने में लोगों को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। राज्य की आर्थिक समीक्षा के अनुसार वर्तमान में 267 अस्पताल, 849सीएचसी, 2 हजार 875 पीएचसी, 15 हजार 292 उपकेन्द्र तथा 638 आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित विभिन्न आयुर्वेद, होम्योपैथिक अस्पताल कार्यरत हैं। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष के बजट में भी चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, सीएचसी से उप जिला चिकित्सालय में क्रमोन्नयन, पीएचसी से सीएचसी में क्रमोन्नयन, उप स्वास्थ्य केंद्र से आयुष्मान आरोग्य मंदिर में क्रमोन्नयन, नवीन उपस्वास्थ्य केंद्र तथा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण सहित विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित उपचार मिले। इसी कड़ी में सरकार द्वारा राज सुरक्षा योजना लागू की गई है, जिससे मरीजों को निकटतम चिकित्सा संस्थानों में त्वरित मेडिकल हेल्प मिल सके। इसके लिए 24 घंटा क्रिटिकल केयर कमाण्ड सेंटर की स्थापना, सीएचसी पर ईसीजी/टेली ईसीजी एवं थ्रोम्बोलिसिस की सुविधाएं तथा हाइवे पर रेस्ट एरिया में एम्बुलेंस तैनात की जाएगी। साथ ही, ट्रोमा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी 150 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। दुर्घटना में जान गवाने वाले मृतक के पार्थिव शरीर को मोर्चरी से घर तक निःशुल्क पहुंचाने के लिए भी मोक्ष वाहिनी योजना शुरू की जाएगी। 

राज्य सरकार द्वारा आमजन के निःशुल्क इलाज के लिए मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मा) संचालित है। योजना में 2 हजार 179 हेल्थ पैकेज के तहत 25 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा है। इस योजना के अन्तर्गत 1 करोड़ 36 लाख परिवार पंजीकृत हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान 15 लाख से अधिक व्यक्ति योजना से लाभान्वित हुए। योजना का विस्तार करते हुए इस बजट में मा योजना के तहत असहाय, विमंदित, लावारिस रोगी को भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, योजना का लाभ सभी पात्र व्यक्तियों को दिलाने के लिए पंचायत स्तर पर आरोग्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।


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