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मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का सर्वोच्च स्वरूप - बिरला*

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23 Jan 26
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मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का सर्वोच्च स्वरूप - बिरला*

कोटा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरुवार को कोटा में श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय के 31वें वार्षिकोत्सव समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सेवा, मर्यादा, नैतिकता और समर्पण का आदर्श है, और यही मूल्य इस चिकित्सालय की कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। बीते तीन दशकों से यह संस्थान मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय की पहचान यह है कि यहाँ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर हर जरूरतमंद को उपचार और संवेदना मिलती है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा का मूल भाव सेवा है, और मंदिर, चिकित्सालय व अन्न सेवा जैसे कार्य इसी परंपरा को जीवंत रखते हैं। प्रभु श्रीराम का जीवन केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि नैतिक जीवन और कर्तव्यबोध का मार्गदर्शक है।

 

बिरला ने कहा कि कोविड काल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों के प्राण बचाए जो भारत की मानवीय शक्ति और सेवा भाव का सच्चा उदाहरण है, जिससे देश की प्रतिष्ठा विश्व स्तर पर सुदृढ़ हुई है।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले समय में कोटा चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में और अधिक सशक्त केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार, समाज और संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ, निःशुल्क उपचार तथा मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन व विश्राम के लिए रामाश्रय जैसी व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं, जिससे कोटा मेडिकल टूरिज्म के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा।

 


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