कोटा: बसंत ऋतु के आगमन के उपलक्ष्य में बसंतोत्सव का आयोजन हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, विधि, अभियंत्रण, रक्षा एवं अकादमिक क्षेत्र से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बसंतोत्सव कार्यक्रम में सभी अतिथियों व सहभागियों का स्वागत करते हुए बसंत को नवचेतना, सांस्कृतिक समरसता एवं सृजन का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. प्रीतिमा व्यास ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि “बसंतोत्सव केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों, मूल्यों और रचनात्मकता को प्रकृति से जोड़ने वाली सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।” उन्होंने ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक निरंतरता के लिए आवश्यक बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नरेंद्र शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “सांस्कृतिक उत्सव नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करते हैं, जो एक लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं।”
विशिष्ट अतिथि श्री बिगुल जैन, पूर्व उप मुख्य अभियंता, थर्मल पावर स्टेशन, कोटा ने कहा कि “बसंतोत्सव जैसे आयोजन हमें यह स्मरण कराते हैं कि विकास के साथ-साथ परंपराओं का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।”कार्यक्रम के गौरव अतिथि भारतीय नौसेना से श्री त्रिलोक कुँवर ने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि “संस्कृति के प्रति जागरूकता, अनुशासन और देशभक्ति मिलकर जिम्मेदार नागरिक एवं सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।”
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन शशि जैन, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि “पुस्तकालय और सांस्कृतिक मंच मिलकर कला, परंपरा और आजीवन शिक्षा को जोड़ने का कार्य करते हैं।”
कार्यक्रम का सफल आयोजन अजय सक्सेना एवं रोहित नामा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि “सामुदायिक सहभागिता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारी विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।आभार परामर्शदाता राम निवास धाकड़ ने प्रदान किया |
बसंतोत्सव का समापन सभी अतिथियों, सहभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह में सांस्कृतिक गौरव, एकता एवं उल्लास की भावना का संचार किया।