राजा राममोहन राय की जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे आयोजित व्याख्यानमाला एवं सम्मान समारोह मे वक्ताओं ने सार्वजनिक पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के संग्रह का केंद्र नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, साहित्य, संस्कृति, विचार और मानवीय मूल्यों के संवाहक के रूप में स्थापित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रंगकर्मी ,लेखक एवं अभिनेता अश्वत्थामा दाधीच , मुख्य अतिथि प्राशान्त टेल्यहानी वरिष्ठ वीर रस कवि एवं लेखक , गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ प्रीतिमा व्यास , मनोहर पारीक एवं विशिष्ट अतिथि अरविंद यादव सामाजसेवी एवं विचारक एवं मुकेश गौड , योगेंद्र सिह तंवर रहे | मंच संचालन के.बी. दीखित ने किया |
स्वागत भाषण में डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने सार्वजनिक पुस्तकालयों को “समाज का लोकतांत्रिक ज्ञान केंद्र” बताते हुए कहा कि पुस्तकालय अब केवल अध्ययन स्थल नहीं बल्कि नवाचार, समावेशन और सामाजिक संवाद के सशक्त माध्यम बन चुके हैं।
अध्यक्ष अश्वत्थामा दाधीच ने पुस्तकालयों को रचनात्मकता, रंगकर्म और सामाजिक चेतना का जीवंत मंच बताया। मुख्य अतिथि प्रशांत टेल्यहानी ने साहित्य और वीर रस की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में सार्वजनिक पुस्तकालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. प्रीतिमा व्यास ने पुस्तकालयों को शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और बौद्धिक विकास का आधार कहा। विशिष्ट अतिथि अरविंद यादव ने पुस्तकालयों को सामाजिक परिवर्तन और सकारात्मक चिंतन का केंद्र बताया, जबकि मुकेश गौड़ ने पुस्तकालय कर्मियों की प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना की सराहना की।
इसी क्रम में राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालय में कार्यरत परामर्शदाता रामनिवास धाकड़ को "बेस्ट पब्लिक लाईब्रेरी वर्कर ऑफ दी यीयर -2026" सम्मान प्रदान कर पुस्तकालय सेवा में समर्पण, अनुशासन और जनसहभागिता को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन के.बी. दीक्षित ने किया तथा आभार शशि जैन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रबंधन अजय सक्सेना ने किया |