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प्रदेश में पहला प्रयास,अब प्रेरक बैच,रोज चर्चा का विषय बनेगा,तभी प्रदेश में अंगदान बढ़ेगा

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30 Jul 26
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प्रदेश में पहला प्रयास,अब प्रेरक बैच,रोज चर्चा का विषय बनेगा,तभी प्रदेश में अंगदान बढ़ेगा

शाइन इंडिया फाउंडेशन प्रारंभ से ही नेत्रदान अंगदान और देहदान में नए-नए नवाचारों से प्रदेश में सेवा कार्यों को बढ़ाने में सहायक बना है । इस बार पुनः संस्था ने अनूठी पहल की है,अब अंगदान संकल्प लेने वालों को मिलेगा ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ एंबेसडर बैच’, जिसे पहनकर संकल्प लेने वाला व्यक्ति, दूसरों को तो प्रेरित करेगा ही, बल्कि यही से अंगदान के विषय में चर्चा प्रारंभ हो सकेगी ।

अंगदान के प्रति जागरूकता को केवल संकल्प पत्र और प्रमाण-पत्र तक सीमित न रखते हुए उसे समाज के बीच एक जीवंत संदेश बनाने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा ने एक अनूठी पहल शुरू की है। संस्था की ओर से अब अंगदान का संकल्प लेने वाले लोगों को गिफ्ट ऑफ लाइफ एंबेसडर बैच प्रदान किया जाएगा, जिस पर लिखा रहेगा,आई प्लेज्ड टू ऑर्गन डोनेशन ।

इस गिफ्ट ऑफ लाइफ एंबेसडर बैच का लोकार्पण संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने किया । संभागीय आयुक्त ने भी इस बैच के पीछे की भावना को जब जाना तो,नवाचार की काफी सराहना की, उन्होंने कहा कि निश्चित ही इस तरह का बैच जब युवा लगाकर कहीं निकलेंगे, तो अंगदान के विषय पर चर्चा अवश्य होगी ।

इस पहल के पीछे एक महत्वपूर्ण सोच है। आमतौर पर जब कोई व्यक्ति अंगदान का संकल्प लेता है तो,वह वेबसाइट के माध्यम से अपना प्रमाण-पत्र प्राप्त करता है। लेकिन बाद में यह प्रमाण-पत्र अक्सर किसी फाइल, दराज या अलमारी में सुरक्षित रह जाता है। वह व्यक्ति के संकल्प का प्रमाण तो होता है, लेकिन समाज में दूसरे लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने का माध्यम नहीं बन पाता।

इसी प्रकार कई लोग अपने ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य पहचान-पत्रों पर अंगदाता होने की जानकारी रखते हैं। यह जानकारी व्यक्ति के पास तो रहती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में दूसरे लोगों का ध्यान उस पर नहीं जाता। कई बार तो ऐसी जानकारी दुर्घटना जैसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में ही सामने आती है। ऐसे में उससे नए लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना लगभग संभव नहीं हो पाता।

इसी सोच के साथ शाइन इंडिया फाउंडेशन ने ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ एंबेसडर बैच’ की अवधारणा को सामने रखा है। यह बैच अंगदान का संकल्प लेने वाले व्यक्ति की सार्वजनिक पहचान बनेगा। जब कोई व्यक्ति इसे पहनकर अपने कार्यस्थल, सामाजिक कार्यक्रम, बाजार, यात्रा या अन्य स्थानों पर जाएगा, तो उसके संपर्क में आने वाले लोग स्वाभाविक रूप से इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक होंगे।

एक बैज, एक संवाद और एक नया संकल्प

संस्था के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि, “हमारा उद्देश्य यह है कि,अंगदान का संकल्प केवल एक प्रमाण-पत्र बनकर फाइल या अलमारी में बंद न रहे। घर,परिवार और समाज में प्रतिदिन और प्रति घंटा चर्चा हो, तब जाकर अंगदान राजस्थान प्रदेशमें प्रगति कर सकता हैऔर एक व्यक्ति का संकल्प अनेक लोगों को प्रेरित करे। यह बैच पहनने वाला हर व्यक्ति स्वयं एक चलता-फिरता जागरूकता संदेश बन जाएगा।”

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति दिनभर में जितने भी लोगों से मिलता है, उनमें से अनेक लोगों का ध्यान इस बैच पर जाएगा। कोई पूछेगा—‘यह बैच किस बात का है?’ और यहीं से अंगदान पर बातचीत शुरू होगी। संभव है कि एक छोटी-सी बातचीत किसी व्यक्ति को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित कर दे।

‘यह बैच सिर्फ पहनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन देने के संकल्प की पहचान है।’

संस्था के अनुसार, अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समाज में निरंतर संवाद आवश्यक है। प्रमाण-पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज जानकारी अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बैच जैसी सार्वजनिक पहचान अंगदान को लोगों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
 


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