उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान कृषि महाविद्यालय में योगाभ्यास शिविर आयोजित किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह एवं भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास के अध्यक्ष श्री हेमेन्द्र श्रीमाली थे।
योगाभ्यास प्रातः 6:30 बजे प्रारम्भ किया गया। सभी को योग संदेश एवं योग ज्ञान के साथ उच्चारण और प्रार्थना के पश्चात सूक्ष्म ग्रीवा चालन, स्कन्ध चालन तथा कर-चालन कराया गया। इसके साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन एवं त्रिकोणासन तथा बैठकर किए जाने वाले आसनों में भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन एवं शशकासन का अभ्यास कराया गया। इसके अतिरिक्त लेटकर किए जाने वाले आसनों में मकरासन, भुजंगासन, सेतुबन्धासन एवं उत्तानपादासन का अभ्यास कराया गया। इसके पश्चात कपालभाति तथा प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, शीतली, भ्रामरी एवं समाधि मुद्रा में ध्यान करवाया गया। संकल्प एवं ज्ञान-ध्यान के साथ योगाभ्यास सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने योग को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि आसन एवं प्राणायाम मनुष्य के शारीरिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास के अध्यक्ष श्री हेमेन्द्र श्रीमाली ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव को विश्व बन्धुत्व का आधार बताते हुए कहा कि योग आज सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है और समस्त मानवता इसका लाभ ले रही है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं छात्र कल्याण निदेशक तथा क्रीड़ा मण्डल के अध्यक्ष डॉ. मनोज महला ने अतिथियों का उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक परिवेश में योग शरीर के साथ-साथ मानसिक शान्ति प्रदान करने वाली ऐसी क्रिया है, जो मनुष्य को सात्विक एवं सन्तुलित जीवन-यापन की ओर अग्रसर करती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, छात्र-छात्राएँ, कर्मचारी तथा न्यास के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन श्री पंकज पालीवाल ने किया।