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कपिवा ने आयुर्वेद को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में 50 करोड़ रुपये का इनोवेशन फंड लॉन्च किया

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24 Jan 26
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कपिवा ने आयुर्वेद को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में 50 करोड़ रुपये का इनोवेशन फंड लॉन्च किया

अपनी तरह की पहली पहल के रूप में यह फंड उन संस्थानों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को सहयोग देगा, जो फॉर्मुलेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लिनिकल स्टडीज़ के माध्यम से प्रमाण-आधारित आयुर्वेदिक समाधान विकसित कर रहे हैं

बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत :  मिलेनियल्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया आधुनिक और समग्र आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा ने आज कपिवा इनोवेशन फंड के लॉन्च की घोषणा की। 50 करोड़ रुपये तक के इस फंड के माध्यम से कंपनी का उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और वैज्ञानिक प्रमाणिकता को मज़बूत करना है। यह फंड शैक्षणिक संस्थानों, रिसर्च लैब्स, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को सहयोग प्रदान करेगा, ताकि आयुर्वेदिक समाधान आधुनिक वैज्ञानिक और क्लिनिकल मानकों के अनुरूप विकसित किए जा सकें।

कपिवा रिसर्च एवं डेवलपमेंट टीम

 

इस पहल के ज़रिये कपिवा एक ऐसा आयुर्वेदिक रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना चाहता है, जो वैश्विक फार्मास्युटिकल मानकों के समकक्ष हो। यह फंड नए फॉर्मुलेशन्स, स्टैंडर्डाइजेशन, फाइटोकेमिस्ट्री, आयुर्वेद में एआई के उपयोग, प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल स्टडीज़, नई एक्सट्रैक्शन टेक्नोलॉजी, बायोएक्टिव एन्हांसमेंट तथा टेक-आधारित वेलनेस मॉडल्स जैसे क्षेत्रों में कार्यरत प्रोजेक्ट्स को समर्थन देगा।

 

इस फंड के लिए रिसर्च संस्थान, पीएचडी स्कॉलर्स, डॉक्टर, अस्पताल, शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स आवेदन कर सकते हैं, जो आयुर्वेद, प्लांट-बेस्ड थैरेप्यूटिक्स या इंटीग्रेटिव हेल्थ से जुड़े क्षेत्रों में सक्रिय हों।

 

कपिवा इनोवेशन फंड को इस तरह संरचित किया गया है कि वह रिसर्च के हर चरण में सहयोग प्रदान कर सके—चाहे कोई प्रोजेक्ट शुरुआती शोध अवस्था में हो या व्यावसायिक लॉन्च के नज़दीक। चयनित प्रोजेक्ट्स को फंडिंग के साथ-साथ मेंटॉरशिप और क्लिनिकल संसाधनों का भी सहयोग मिलेगा, ताकि रिसर्च केवल सैद्धांतिक न रहे, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक और व्यावहारिक बदलाव ला सके।

 

इस फंड की घोषणा करते हुए कपिवा के फाउंडर अमेव शर्मा ने कहा, “लंबे समय तक आयुर्वेद को या तो केवल परंपरा के चश्मे से देखा गया, या फिर उसे आस्था तक सीमित कर दिया गया। हमारा मानना है कि आयुर्वेद का भविष्य परिणामों और वैज्ञानिक प्रमाणों से तय होगा। 50 करोड़ रुपये का यह फंड उसी भविष्य की दिशा में हमारा दीर्घकालिक निवेश है, जहाँ आयुर्वेदिक उत्पादों का विकास और परीक्षण आधुनिक दवाओं की तरह हो—लेकिन उनकी जड़ें भारतीय ज्ञान परंपरा में पूरी मजबूती से बनी रहें।

 

कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन ने कहा, “यदि आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा के समकक्ष स्थान दिलाना है, तो उसे भी उसी वैज्ञानिक अनुशासन और कठोर मानकों से गुजरना होगा। कपिवा में हम पहले से ही स्टैंडर्डाइज्ड एक्सट्रैक्ट्स, ह्यूमन ट्रायल्स और एआई-आधारित इनसाइट्स पर काम कर रहे हैं, जो हमारी फॉर्मुलेशन्स को दिशा देते हैं। कपिवा इनोवेशन फंड के माध्यम से हम शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और उद्यमियों के लिए अपना यह संपूर्ण इकोसिस्टम खोलना चाहते हैं—अपने संसाधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञता साझा करना चाहते हैं—ताकि मज़बूत आयुर्वेदिक विज्ञान शोध-पत्रों से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादों का रूप ले सके और लाखों लोगों तक पहुँच सके।

 

कपिवा पहले से ही देश के सबसे उन्नत आयुर्वेद अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों में से एक संचालित कर रहा है। कंपनी एक समर्पित इन-हाउस रिसर्च टीम के साथ-साथ ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट तथा मणिपाल कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज़, मणिपाल हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

 

वैज्ञानिक सख्ती और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत कपिवा ने कच्चे माल से लेकर पैकेजिंग और अंतिम उत्पाद तक हर स्तर पर कड़े परीक्षण मानक लागू किए हैं। कंपनी के कई शिलाजीत आधारित उत्पाद, जिनमें शिलाजीत गोल्ड रेसिन भी शामिल है, पहले से ही सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस के साथ उपलब्ध हैं। अब इन्हीं गुणवत्ता मानकों को चरणबद्ध तरीके से कपिवा के पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में विस्तारित किया जा रहा है।

 

कपिवा इनोवेशन फंड के लिए आवेदन अब खुले हैं। इच्छुक शोधकर्ता, संस्थान और स्टार्टअप्स कपिवा की वेबसाइट पर उपलब्ध विशेष पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। चयनित प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक मजबूती, नवाचार, व्यावहारिकता तथा बड़े स्तर पर स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की क्षमता जैसे मानकों के आधार पर कपिवा की आरएंडडी टीम और स्वतंत्र विषय-विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।


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