केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने का स्पष्ट संकेत दिया। यह उनका लगातार नौवां बजट भाषण रहा, जिसमें उन्होंने विकास, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक संतुलन तीनों को साधने का प्रयास किया। बजट भाषण का केंद्रीय स्वर *विकसित भारत 2047* की परिकल्पना रहा, जिसे सरकार ने दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में सामने रखा।
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद भवन के लोकसभा में आम बजट 2026-27 का भाषण लगभग 1 घंटा 25 मिनट (85 मिनट) तक बोला। उन्होंने भाषण सुबह करीब 11 बजे शुरू किया और 12:25 बजे के आसपास समाप्त किया, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से वित्त विधेयक को सदन में पेश किया गया। यह अवधि उनके करियर में बजट भाषणों के इतिहास में छठा सबसे लम्बा माना गया है, क्योंकि पिछले भाषणों की लंबाई अलग-अलग रही है। उदाहरण के लिए, उनका सबसे लंबा बजट भाषण 2020 में लगभग 2 घंटे 42 मिनट का था, जबकि कुछ अन्य वर्षों में भाषण की अवधि 1 घंटा 30 मिनट से अधिक या उससे कम भी रही है।
1 फरवरी को संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में भले ही राज्यों के लिए अलग-अलग पैकेज घोषित नहीं किए गए हों, लेकिन राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से बड़े, सीमावर्ती और संसाधन-समृद्ध राज्य को कई नीतिगत घोषणाओं से प्रत्यक्ष और परोक्ष लाभ मिलता दिखाई देता है। बजट का फोकस अवसंरचना, ऊर्जा, खनन, पर्यटन, रेलवे और राज्यों को पूंजीगत सहायता पर रहा, जिसका असर राजस्थान पर साफ तौर पर पड़ेगा। रेलवे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में राज्य को सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा बजट में रेलवे के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाने और नई हाई-स्पीड व मल्टी-ट्रैक परियोजनाओं पर जोर दिया गया है। राजस्थान में पहले से चल रही और प्रस्तावित रेल परियोजनाओं— डूंगरपुर बांसवाड़ा रतलाम, नीमच–बांसवाड़ा–दाहोद,जोधपुर–फलोदी,
अजमेर–सवाई माधोपुर–कोटा, बीकानेर– नागौर– जोधपुर सेक्शन को इससे गति मिलने की उम्मीद है। सीमावर्ती जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से रक्षा, पर्यटन और व्यापार तीनों को लाभ होगा।
सौर और अक्षय ऊर्जा में राजस्थान की निर्णायक भूमिका को देखते हुए केंद्रीय बजट में ग्रीन एनर्जी और सोलर मिशन को निरंतर प्राथमिकता दी गई है।
राजस्थान देश का ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पोटेंशियल वाला राज्य है और जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर जैसे जिलों में पहले से स्थापित सोलर पार्क और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
बजट में ग्रीन हाइड्रोजन, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण पर निवेश से राजस्थान में आने वाले नए प्रोजेक्ट, रोजगार और निजी निवेश बढ़ने की संभावना है। बजट में खनिज सुरक्षा, रेयर अर्थ और घरेलू खनन को बढ़ावा देने की नीति से खनिज और स्टोन इंडस्ट्री को मजबूती राजस्थान को खास लाभ मिलेगा। मार्बल,ग्रेनाइट, सैंडस्टोन,लाइमस्टोन, जिंक, सीसा, तांबा और अन्य खनिजों को लाभ मिलेगा।
राजस्थान का स्टोन और माइनिंग सेक्टर पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत है। लॉजिस्टिक्स सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश से इस उद्योग की लागत घटेगी और निर्यात को बल मिलेगा। पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश की हेरिटेज संपदाओं, समृद्ध विरासत और डेजर्ट सर्किट को लाभ मिलेगा। बजट में पर्यटन को रोजगार से जोड़ते हुए हेरिटेज और डेजर्ट टूरिज्म को प्रोत्साहन देने की नीति दोहराई गई है। प्रदेश के पर्यटन स्थलों जयपुर, जोधपुर,उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर
धार्मिक पर्यटन: पुष्कर, नाथद्वारा, मेहंदीपुर बालाजी, बेणेश्वर आदि में बेहतर सड़क, रेलवे और हवाई संपर्क से राजस्थान पर्यटन को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार और होटल-हस्तशिल्प उद्योग को मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार ने राज्यों को दीर्घकालिक और कम/ब्याज-मुक्त ऋण देने की व्यवस्था बढ़ाई है।
इससे राज्यों को पूंजीगत ऋण। की सुविधा मिलेंगी। यह राजस्थान के लिए भी बड़ी राहत की बात है और राजस्थान सरकार को बिना राजकोषीय दबाव बढ़ाए।सड़क,पुल, जल आपूर्ति,शहरी विकास और स्मार्ट सिटी,सिंचाई और जल संरक्षण परियोजनाएँ तेज गति से लागू करने का अवसर मिलेगा। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्य के लिए बजट में—एग्री- इन्फ्रास्ट्रक्चर,पशुपालन, डेयरी और ऊंट-भेड़ आधारित आजीविका,ग्रामीण स्टोरेज और वैल्यू-चेन
पर जोर देना महत्वपूर्ण है। इससे मरुस्थलीय क्षेत्रों की ग्रामीण आय को सहारा मिलेगा। इसी प्रकार रक्षा और सीमावर्ती क्षेत्र बजट में रक्षा अवसंरचना और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर निरंतर ध्यान रखा गया है। राजस्थान की पाकिस्तान से लगती हुई लंबी सीमा से सटे जिले—बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर—में
सड़क,लॉजिस्टिक्स और संचार सुविधाएँ आदि के
बेहतर होने से सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय विकास को भी गति मिलेगी। केंद्रीय बजट 2026-27 में राजस्थान के लिए कोई अलग “राज्य पैकेज” की प्रत्यक्ष घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रेलवे, ऊर्जा, खनन, पर्यटन, राज्यों को ऋण और अवसंरचना निवेश आदि ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें राजस्थान स्वाभाविक लाभार्थी बनकर उभरता है। यह बजट राजस्थान को अगले 10–15 वर्षों के विकास इंजन के रूप में तैयार करने की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला है।बशर्ते राज्य सरकार इन अवसरों का समय पर और प्रभावी उपयोग करे।
बजट भाषण पर सत्ता पक्ष ने इसे दूरदर्शी और विकासोन्मुख बताया, वहीं विपक्ष ने मध्यम वर्ग के लिए प्रत्यक्ष कर राहत न होने पर सवाल उठाए। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट तात्कालिक लोकलुभावन कदमों से अधिक दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और निवेश पर केंद्रित है। केन्द्रीय बजट को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेताओं ,सांसदों एवं विधायकों की प्रतिक्रिया भी सामने आयी है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट 2026 को समावेशी, प्रगतिशील और दूरदर्शी बजट बताया और के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह बजट विकसित भारत का मजबूत रोडमैप है, जो बुनियादी ढांचे से ए आई तक, ग्रामीण समृद्धि से पर्यटन तक, युवा शक्ति की भागीदारी से मजबूत अर्थव्यवस्था तक और स्वास्थ्य सेवाओं से जन कल्याण तक हर क्षेत्र को समेटे हुए है। प्रतिपक्ष ने इसे ऊंची दुकान फीके पकवान बताया है।
केन्द्रीय बजट के तीन विशेषताएं हैं । निवेश और रोजगार से इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं व अवसर, और सबका साथ सबका विकास के संकल्प के साथ हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना। आधुनिकता और विरासत का यह संगम स्वस्थ, समर्थ और आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करेगा। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में भारत ने अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और आने वाले वर्ष में भी यह गति बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है। बजट भाषण में आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ भविष्य के लिए निवेश पर विशेष जोर दिखाई दिया। बजट में विकास और वित्तीय अनुशासन का संतुलन देखा है सकता है।
बजट भाषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सरकार ने राजकोषीय अनुशासन से समझौता किए बिना विकास को गति देने की रणनीति अपनाई है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रित दायरे में रखने का लक्ष्य जारी रहेगा, ताकि बाजारों में भरोसा बना रहे और महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सके। इसके साथ ही पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी को आर्थिक पुनरुत्थान का प्रमुख इंजन बताया गया।भाषण में अवसंरचना विकास को रोजगार सृजन और निजी निवेश को आकर्षित करने का माध्यम बताया गया। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, शहरी परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी निवेश को दीर्घकालिक विकास की नींव के रूप में प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री के अनुसार, पूंजीगत व्यय का गुणक प्रभाव (मल्टीप्लायर इफेक्ट) अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को भी गति देगा। निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में राज्यों की भूमिका और सहकारी संघवाद को विशेष रूप से रेखांकित किया है। राज्यों को दीर्घकालिक, कम ब्याज या ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा को सहकारी संघवाद की दिशा में एक मजबूत कदम बताया गया। इससे राज्यों को अपने स्तर पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू करने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।
बजट भाषण में कर नीति स्थिरता का संदेश दिया गया है। हालांकि करदाताओं के लिए कोई बड़ा चौंकाने वाला बदलाव नहीं किया गया है। आयकर स्लैब में स्थिरता बनाए रखकर सरकार ने यह संकेत दिया कि वह कर प्रणाली में निरंतरता चाहती है। हालांकि, कर प्रशासन को सरल बनाने, रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रियाओं में सुधार और विवाद समाधान को आसान बनाने पर जोर दिया गया। इसे मध्यम वर्ग के लिए अप्रत्यक्ष राहत के रूप में देखा जा रहा है। उद्योग और निवेशकों के लिए कर ढांचे में छोटे-छोटे सुधारों के जरिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की बात कही गई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक बनाए रखने हेतु कर-स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता जरूरी है।
तकनीक, विनिर्माण और आत्मनिर्भरता
बजट भाषण में तकनीक और नवाचार को भविष्य की आर्थिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-फार्मा और उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाने की घोषणाएं आत्मनिर्भर भारत की रणनीति को आगे बढ़ाती हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बजट में युवा, कौशल और रोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण में युवाओं और रोजगार पर भी खास ध्यान रखा है। कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने, डिजिटल और एआई-आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जनसांख्यिकीय लाभांश का बेहतर उपयोग हो सकेगा। बजट भाषण में सामाजिक क्षेत्र और समावेशी विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को समावेशी विकास की रीढ़ बताया गया। ग्रामीण बुनियादी ढांचे, कृषि-संबंधित गतिविधियों और छोटे उद्यमों के लिए सहायता योजनाओं का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, 1 फरवरी को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया बजट भाषण स्थिरता, निवेश और भविष्य-उन्मुख सोच का दस्तावेज बनकर सामने आया है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अ2w``२``निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार अल्पकालिक लाभ से अधिक दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। यह बजट भाषण भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।