नई दिल्ली। रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज घोषणा की कि भारतीय रेलवे द्वारा 2026 के दौरान ‘‘52 सप्ताहों में 52 सुधार’’ करने के संकल्प के अनुरूप, दो नए सुधारों को भारतीय रेलवे द्वारा अनुमोदित किया गया है और इनका कार्यान्वयन तत्काल प्रभाव से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि सुधार एक बार की घटना नहीं बल्कि एक सतत प्रक्रिया है।
श्री वैष्णव ने कहा कि इसका प्रभाव आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, क्योंकि भारतीय रेलवे विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक बन गया है और पूरी प्रणाली में नई पीढ़ी की ट्रेनें और काम करने के नए तरीके उभर रहे हैं।
बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाओं के लिए सुधार
पहले सुधार के बारे में बताते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2026 से शुरू होकर, भारतीय रेलवे ट्रेनों, विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों की संपूर्ण सफाई सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहतए सफाई मुख्य रूप से आरक्षित डिब्बों तक ही सीमित थी और रेलवे के इतिहास में पहली बार, सामान्य डिब्बों की सफाई को पूरी तरह से प्रणाली में एकीकृत किया गया है।
सफाई के अलावाए छोटे-मोटे यांत्रिक और विद्युत संबंधी मरम्मत करने में सक्षम कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी, जिससे एकीकृत ऑन.बोर्ड सेवा प्रदान की जा सकेगी। माल ढुलाई के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बेहतर सुविधाओं से लैस और अधिक गति शक्ति कार्गो टर्मिनल स्थापित किए जा रहे हैं। दूसरे सुधार की ओर मुड़ते हुएए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह 2022 में शुरू की गई गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति पर आधारित है, जिसने कार्गो टर्मिनल अनुमोदन प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया था। जो काम पहले छह साल में पूरा होता थाए वह अब लगभग तीन महीनों में पूरा होने लगा है और इंजीनियरिंग ड्राइंग, सिग्नलिंग प्लान और इलेक्ट्रिकल प्लान के अनुमोदन को सुव्यवस्थित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, लगभग 20 करोड़ टन की अनुमानित यातायात क्षमता और लगभग 20ए000 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व क्षमता वाले 124 बहु.मॉडल कार्गो टर्मिनल विकसित किए गए हैं।
श्री वैष्णव ने कहा कि तीन वर्षों के अनुभव के आधार पर चार महीने के हितधारक परामर्श के बादए एक महत्वपूर्ण रूप से उन्नत सुधार को मंजूरी दी गई है। इस सुधार के साथए अगले पांच वर्षों में मौजूदा 124 गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों की संख्या बढ़कर 500 से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इसे 2022 के सुधार से भी कहीं अधिक व्यापक और मौलिक सुधार बताया। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कार्गो टर्मिनलों के भीतर प्रसंस्करण का एकीकरण है, जिससे ये टर्मिनल ‘‘कार्गो प्लस प्रोसेसिंग’’ हब में परिवर्तित हो गए हैं। उन्होंने बताया कि सीमेंट क्लिंकर को जीसीटी तक ले जाया जा सकता है और टर्मिनल के भीतर ही इसे पीसकर सीमेंट बनाया जा सकता हैए जिसके बाद इसे बोरियों में भरा जा सकता है या रेडी-मिक्स कंक्रीट वाहनों के माध्यम से भेजा जा सकता है। इसी प्रकार, अनाज प्रसंस्करण, भराई और खाली करना तथा अन्य मूल्यवर्धन गतिविधियाँ अब टर्मिनल परिसर के भीतर ही की जा सकती हैं। इससे सामग्री को टर्मिनल तक लाने से पहले कहीं और संसाधित करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, कृत्रिम बाधाएँ दूर हो जाती हैं और रेलवे को अतिरिक्त कार्गो यातायात आकर्षित करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि कई कम उपयोग में आने वाले माल गोदामों को जीसीटी और कार्गो सुविधाओं के रूप में विकसित किया जाएगा। पिछली नीतियों के तहत विकसित पुरानी साइडिंग सरलीकृत जीसीटी ढांचे में स्थानांतरित हो सकती हैं। टर्मिनलों और मुख्य लाइनों के बीच छोटे कनेक्टिंग खंडों के लिए, जहाँ निजी ऑपरेटरों को उपकरणों की उच्च लागत के कारण पटरियों और विद्युत प्रणालियों के रखरखाव में कठिनाई होती थी, रेलवे अब भुगतान के आधार पर वैकल्पिक रूप से रखरखाव करेगा, जिससे सुरक्षा में सुधार होगा और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
इस सुधार से वाई-कनेक्शन और रेल-ओवर-रेल संरचनाओं सहित विस्तारित साझा उपयोगकर्ता सुविधाओं की अनुमति मिलती है। मल्टी-जीसीटी कनेक्टिविटी को औपचारिक रूप दिया गया है ताकि यदि किसी मौजूदा खंड के साथ एक नया टर्मिनल विकसित किया जाता है, तो कनेक्टिविटी से इनकार न किया जा सके, जिससे उन विवादों को रोका जा सके जो पहले मुकदमेबाजी का कारण बनते थे। एक विवाद निवारण ढांचा पेश किया गया है जिसके तहत टर्मिनल डेवलपर्स और रेलवे अधिकारियों के बीच मासिक या मील के पत्थर पर आधारित संयुक्त बैठकें होंगी, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त नोट और ‘‘विवाद रहित प्रमाण पत्र’’ जारी किए जाएंगे, जिससे मध्यस्थता या अदालती मामलों की आवश्यकता कम हो जाएगी।
मानक लेआउट को नीति में शामिल किया गया है और मानक डिजाइन अपनाने वाले आवेदकों को स्वचालित अनुमोदन प्राप्त होगा, जैसा कि दूरसंचार सुधार मॉडल में हुआ था जहां मानकीकरण ने अनुमोदन समय को काफी कम कर दिया था। जीसीटी और माल-संबंधी सुविधाओं के लिए अनुबंध की अवधि 35 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष कर दी गई है, जिससे दीर्घकालिक निवेश और पारिस्थितिकी तंत्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
अनुमान लगाया कि इस सुधार से माल ढुलाई में सुधार के माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 30,000 करोड़ का रूपये अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। उन्होंने नवंबर-दिसंबर में शुरू किए गए सीमेंट परिवहन सुधार का उदाहरण दिया, जिसके तहत थोक सीमेंट की मात्रा दोगुनी से अधिक हो गई, जनवरी में यह लगभग 95,000 टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह लगभग 40,000 टन थी। उन्होंने बताया कि रेल आधारित थोक सीमेंट परिवहन से लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर में 30 प्रतिशत तक और मिजोरम में लगभग आधी कमी शामिल है, साथ ही वैज्ञानिक परिवहन विधियों के माध्यम से प्रदूषण में भी कमी आई है।
आगे और सुधार होंगे
श्री वैष्णव ने आगे कहा कि सात और सुधारों पर काम चल रहा है, जिनमें से दो का अनावरण इस महीने और तीन का मार्च की शुरुआत में किया जाएगा और 30-40 अन्य सुधारों पर काम शुरू कर दिया गया है। यात्री सेवाओं और माल ढुलाई में संरचनात्मक सुधारों के साथए भारतीय रेलवे एक महत्वाकांक्षी वर्ष.दीर्घकालीन परिवर्तन एजेंडा की शुरुआत कर रहा है।