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दक्षिणी कमान के मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान ने एकीकृत बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से सम्पूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण पर आधारित तैयारी को सुदृढ़ किया

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27 Mar 26
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दक्षिणी कमान के मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान ने एकीकृत बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से सम्पूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण पर आधारित तैयारी को सुदृढ़ किया

 दक्षिणी कमान ने अपने दायित्व क्षेत्र में मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान के अंतर्गत व्यापक स्तर पर विविध गतिविधियों का आयोजन किया, जिनमें सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, शिक्षण संस्थानों तथा उद्योग जगत को एक समन्वित प्रयास में साथ लाया गया, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत तैयारी को और मजबूत किया जा सके। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान तथा दक्षिणी राज्यों में फैले दक्षिणी कमान के विभिन्न सैन्य स्टेशनों पर आयोजित इस अभियान ने सुरक्षा के प्रति भारतीय सेना की सम्पूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण आधारित प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। इस पहल ने संस्थागत अभिसरण को बढ़ावा दिया, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ किया तथा बदलते और जटिल सुरक्षा परिदृश्य में विविध हितधारकों की सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाया।

 

      इस अभियान के माध्यम से परिचालन, प्रौद्योगिकी, प्रशासनिक तथा ज्ञान-आधारित क्षमताओं के सुनियोजित समेकन को प्रदर्शित किया गया। इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नागरिक प्रशासन, केंद्र एवं राज्य स्तरीय आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों, हवाई अड्डा एवं नागरिक उड्डयन एजेंसियों, वन एवं खनन विभागों, एनसीसी, शैक्षणिक संस्थानों तथा उद्योग भागीदारों की व्यापक भागीदारी रही। इन संयुक्त प्रयासों ने उभरते खतरों की साझा समझ विकसित की, समान कार्यप्रणालियों को अपनाने को प्रोत्साहित किया तथा आंतरिक सुरक्षा, वायु क्षेत्र जागरूकता, संकट प्रतिक्रिया, आपदा प्रबंधन, प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी तथा संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एकीकृत योजना के महत्व को प्रमाणित किया।

 

      उभरते बहु-क्षेत्रीय खतरों के परिप्रेक्ष्य में हिंटरलैंड की सुरक्षा तैयारी का आकलन करने हेतु मुख्यालय दक्षिणी कमान, पुणे में एक उच्च स्तरीय टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस अभ्यास की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान ने की। इसमें महाराष्ट्र शासन के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न जोनों के मंडलीय रेल प्रबंधक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं अन्य संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 

      अभियान के अंतर्गत उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक केंद्रित गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। पुणे में औंध मिलिट्री स्टेशन पर बहु-एजेंसी अभ्यास के माध्यम से सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन, आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों, पुलिस तथा एनसीसी ने संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र और समान कार्यप्रणालियों का परीक्षण किया। भोपाल में आयोजित काउंटर-यूएएस सेमिनार में सैन्य विशेषज्ञों, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारियों की भागीदारी रही, जिससे उभरते हवाई खतरों के प्रति साझा समझ और सहयोग को बल मिला। बबीना में सेना, पुलिस, वन एवं खनन विभागों की संयुक्त गतिविधियों, निगरानी, संयुक्त गश्त तथा आसपास के गांवों में जनसंपर्क प्रयासों ने जमीनी स्तर पर समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ किया। चेन्नई में विजय वार मेमोरियल पर आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन तथा राज्य एजेंसियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने आंतरिक सुरक्षा और संकट प्रतिक्रिया पर विचार-विमर्श किया। बेलगावी और हैदराबाद में आयोजित गतिविधियों ने प्रशिक्षण, तैयारी और संस्थागत समन्वय के क्षेत्र में अंतर-एजेंसी सहयोग को और मजबूत किया, जबकि जोधपुर और जैसलमेर की गतिविधियों ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नागरिक-सैन्य समन्वय, सूचना साझाकरण तथा सामूहिक तैयारी को सुदृढ़ किया।

 

      इन संयुक्त प्रयासों की सबसे उल्लेखनीय विशेषता केवल समन्वय नहीं, बल्कि साझा उद्देश्य की भावना के साथ विभिन्न एजेंसियों का एक मंच पर आना रहा। भारतीय सेना और सरकारी तथा नागरिक एजेंसियों ने एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया, अपनी-अपनी विशिष्ट क्षमताओं का योगदान दिया और इस प्रक्रिया में परस्पर सीख को भी बढ़ावा दिया। इन सहयोगात्मक प्रयासों से पारस्परिक विश्वास बढ़ा, सूचना प्रवाह बेहतर हुआ, निर्णय प्रक्रिया अधिक त्वरित बनी और बदलती परिस्थितियों के प्रति अधिक समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हुई।

 

      मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान ने यह रेखांकित किया कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का समाधान अब पृथक-पृथक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सैन्य तंत्र और व्यापक राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र के बीच निर्बाध साझेदारी आवश्यक है। परिचालन तैयारी को नागरिक क्षमता, प्रौद्योगिकीय जागरूकता तथा अंतर-एजेंसी समन्वय से जोड़ते हुए, दक्षिणी कमान ने ऐसी तैयारी के मॉडल को आगे बढ़ाया जो सहयोगात्मक, अनुकूलनक्षम और भविष्य उन्मुख है।

 


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