नई दिल्ली। सतत् विकास (सस्टेनेबिलिटी), ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उत्तर रेलवे ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उत्तर रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई 2026) के दौरान विभिन्न रेलवे स्टेशनों और सेवा भवनों पर 2,224 केडब्ल्यूपी (लगभग 2.2 एमडब्ल्यू) क्षमता के ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट चालू किए हैं।
मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि इन नए संयंत्रों की स्थापना के साथ, उत्तर रेलवे की संचयी सौर क्षमता केडब्ल्यूपी बढ़कर 28,347 (लगभग 28.35 एमडब्ल्यू) हो गई है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के प्रयासों, नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने और पर्यावरण के अनुकूल सतत् परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में उसके कदमों को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों के दौरान, उत्तर रेलवे के सौर ऊर्जा संयंत्रों ने लगभग 3.4 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कियाए जिससे ऊर्जा लागत में लगभग 2.2 करोड़ रूपये की अनुमानित बचत हुई। इस सौर ऊर्जा के उत्पादन से लगभग 2.820 टन सीओ2 (कार्बन डाइऑक्साइड) उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है, जो जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने, रेलवे परिचालन के डीकार्बोनाइजेशन और भारत सरकार के ‘‘स्वच्छ और हरित भविष्य’’ के दृष्टिकोण को साकार करने में एक सार्थक योगदान देगा। ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ, यह पहल रेल परिचालन के सतत विकास और पर्यावरणीय दक्षता को भी बढ़ाती है।
उत्तर रेलवे सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के माध्यम से अपने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का लगातार सक्रियता से विस्तार कर रहा है, जो सतत् विकास, ऊर्जा दक्षता, डीकार्बोनाइजेशन और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये पहल भारतीय रेल को दुनिया के सबसे बड़े हरित परिवहन नेटवर्क में से एक में बदलने और देश के स्वच्छ ऊर्जा व जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।