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-अमृत भारत स्टेशन योजना में सादुलपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को मिलेंगी बेहतरीन सुविधाएँ

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03 Jul 26
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-अमृत भारत स्टेशन योजना में सादुलपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को मिलेंगी बेहतरीन सुविधाएँ

जयपुर। बीकानेर के महाराजा सादुल सिंह के नाम पर रखा गया सादुलपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन, चुरू ज़िले का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है। यह दिल्ली-रेवाड़ी-लोहारू-सादुलपुर, चुरू-बीकानेर रेल, हिसार-सादुलपुर, चुरू-जोधपुर रेल रूट पर स्थित है। सादुलपुर में कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए एक थोक बाज़ार है। इस शहर में कमोडिटी उत्पादों का व्यापार स्थानीय लोगों के लिए हमेशा से ही एक ज़बरदस्त कारोबार रहा है। सादुलपुर की अनाज मंडी इस इलाके में कृषि व्यापार के लिए एक अहम केंद्र है।इस इलाके में शानदार और बारीक फ़्रेस्को पेंटिंग वाली हवेलियाँ और पारंपरिक इमारतें हैं, जो शेखावाटी की पहचान हैं।  
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने बताया कि अपनी हस्तशिल्प कला एवं पर्यटन की दृष्टी से महत्वपूर्ण सादुलपुर, के रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। अमृत भारत  स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन के पुनर्विकसित होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, आवागमन सुगम होगा एवं व्यापारी वर्ग भी लाभान्वित होगा। स्टेशन भवन के समरूप में बड़े स्तर पर सुधार कार्य, स्टेशन की ओर आने-जाने वाले मार्ग में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग प्रावधान का कार्य, बाउंड्री वॉल, सर्कुलेटिंग एरिया में सौंदर्य करण, दोपहिया, चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग सुविधा, बुकिंग ऑफिस रिटायरिंग रूम आदि में सुधार, नए टॉयलेट ब्लॉक्स लगाए जा रहे हैं।
लगभग 18.70 करोड़ की लागत से होने वाले पुनर्विकास कार्यों में उपरोक्त कार्याे के अलावा सौंदर्य वर्धन के लिए एलइडी लाइटिंग भी की जायेगी। सभी सुविधाओं का दिव्यांगजनों तक पहुंच बनाने के लिए उपयुक्त साइनेज भी लगाया जायेगा। इस स्टेशन पर कला एवं संस्कृति का समन्वय करते हुए दीवारों एवं छतों पर आकर्षक पेंटिंग भी की जायेगी। इसके अलावा यात्री सूचना प्रणाली में सुधार हेतु के कोच गाइडेंस डिस्प्ले बोर्ड, मल्टीलाइन डिस्पले बोर्ड्स, सिंगल लाइन डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बड़े एलइडी स्क्रीन्स तथा जीपीएस आधारित डिजिटल क्लॉक भी लगाया जायेगा। सादुलपुर स्टेशन पर 12 मीटर चौड़ा पैदल पुल भी बनाया जा रहा है, जिसका 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 8.84 करोड़ रुपए है। स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था, सुगम, निर्बाध एवं निरंतर तकनीकी रेल कार्यों के संचालन हेतु हरित ऊर्जा उत्पादन सोलर ऊर्जा प्लांट भी स्थापित किया जायेगा। इस हेतु लगभग 18 लाख की लागत से 40 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है।
स्टेशन के पुनर्विकास से स्थानीय कारीगर एवं मजदूरों को रोजगार मिला है जिससे उनकी आय बढी है। स्टेशन के पुनर्विकसित होने से पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प कला आदि को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की लोकप्रियता बढ़ेगी एवं साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस प्रकार स्टेशन के पुनर्विकास से क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी होगा।


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