पेसिफिक विश्वविद्यालय के पेसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट द्वारा “रोड सेफ्टी” विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा ट्रैफिक नियमों के पालन के महत्व को समझाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नारायण चौधरी (आधार फाउंडेशन, उदयपुर), श्री सुनील चारण (सर्किल इंस्पेक्टर, उदयपुर) एवं श्री N.M. गुलज़ार (एडिशनल आरटीओ) रहे। इस कार्यक्रम मे प्रो. टी.पी आमेटा, प्रो. दिपिन माथुर व डॉ पुष्पा मेंदू उपस्थित थे | कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा आज के समय की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते हुए उनका पालन करने के लिए प्रेरित किया। पेसिफिक विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रोफेसर हेमंत कोठारी ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को वाहन चलाते समय सतर्कता, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना अपनाने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि श्री नारायण चौधरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत जागरूकता और अनुशासन ही दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने नए स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम की जानकारी देते हुए बताया कि शहर के प्रमुख चौराहों पर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग एवं हेलमेट न पहनने जैसे नियम उल्लंघनों की तुरंत पहचान कर लेते हैं।
सर्किल इंस्पेक्टर श्री सुनील चारण ने सड़क सुविधाओं के सही उपयोग, लेन अनुशासन के पालन तथा ट्रैफिक नियमों के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित वीडियो उदाहरण प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को लापरवाही के दुष्परिणामों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से हेलमेट एवं सीट बेल्ट के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल हेलमेट पहनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्ट्रैप बांधना भी अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने बताया कि कार में एयरबैग तभी प्रभावी रूप से कार्य करता है जब सीट बेल्ट लगी हो, क्योंकि एयरबैग का सेंसर सीट बेल्ट के साथ सक्रिय होता है।
एडिशनल आरटीओ श्री N.M. गुलज़ार ने कहा कि यदि नागरिक थोड़ी-सी भी सावधानी बरतें तो दुर्घटनाओं के अनुपात में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को समय से पहले वाहन न सौंपें, क्योंकि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपकरणों का सही उपयोग दुर्घटना के समय जीवन रक्षा की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।
कार्यक्रम के अंत में श्री अमोस मार्क द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कृपा जैन द्वारा प्रभावी रूप से किया गया। सेमिनार में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।