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जिंदगी और मौत के बीच 25 दिन का संघर्ष, हताश माता-पिता के लिए ईश्वर बने पीएमसीएच के डॉक्टर

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30 Jun 26
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जिंदगी और मौत के बीच 25 दिन का संघर्ष, हताश माता-पिता के लिए ईश्वर बने पीएमसीएच के डॉक्टर

उदयपुर।  एक 7 साल का मासूम, जो कल तक आंगन में खेलता-कूदता था, अचानक बिस्तर पर आ गया। उसका ब्लड प्रेशर (बीपी) 200 की डरावनी रफ्तार से भाग रहा था। यह वो आंकड़ा है, जिस पर किसी भी पल हार्ट अटैक या ब्रेन हैमरेज हो सकता है। माता-पिता की सांसें हर पल अटक रही थीं। बड़े अस्पताल, 25 दिन का इलाज, लेकिन मर्ज पकड़ में नहीं आया। हताशा और निराशा के बीच जब यह परिवार अपने बच्चे को लेकर पीएमसीएच पहुंचा, तो यहां के डॉक्टरों ने न सिर्फ उस दुर्लभ बीमारी को पकड़ा, बल्कि अपनी काबिलियत से मासूम को मौत के मुंह से खींच लिया। यह कहानी उन सफेद कोट वाले फरिश्तों की है, जिनके लिए हर जान कीमती है।

परिजनों ने नम आंखों से बताया कि उनका बेटा एकदम स्वस्थ था। अचानक एक दिन उसे घबराहट और बेतहाशा पसीने आने लगे। परिजनों ने स्थानीय चिकित्सक को दिखाया तो  बीपी 200 तक पहुंच गया था। 7 साल के बच्चे के लिए यह स्थिति जानलेवा थी। घबराए माता-पिता बेहतर इलाज की उम्मीद में तुरंत अन्य शहर लेकर गए। वहां बच्चें को लगभग 25 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

वहॉ से निराश होकर परिजन बच्चे को पीएमसीएच लेकर आए। यहां बाल एवं नवजात शिशु सर्जन डॉ. प्रवीण झंवर को दिखाया बच्चें की गहन जांच के बाद जो सच सामने आया, वो चौंकाने वाला था। बच्चा फियोक्रोमोसाइटोमा नाम की एक बेहद दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा था।

डॉ. प्रवीण झंवर ने बताया कि यह किडनी के ठीक ऊपर स्थित एड्रेनल ग्रंथि का एक दुर्लभ ट्यूमर है। यह ट्यूमर शरीर में एड्रेनालिन हार्माेन का स्राव बहुत ज्यादा बढ़ा देता है, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। बच्चों में यह मामला लाखों में से किसी एक में देखने को मिलता है।

इस बीमारी में सर्जरी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। सबसे बड़ा रिस्क यह था कि ट्यूमर को शरीर से निकालते समय बीपी या तो खतरनाक स्तर तक गिर सकता था, या बहुत ज्यादा बढ़ सकता था। एक छोटी सी चूक मासूम की जान ले सकती थी। लेकिन, डॉ. प्रवीण झंवर एवं उनकी टीम के साथ एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। पूरी तैयारी, सटीक तालमेल और जटिल ऑपरेशन के बाद आखिरकार ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाल लिया गया।

इस सफल ऑपरेशन में बाल एवं नवजात शिशु सर्जन डॉ. प्रवीण झंवर, डॉ. उर्जिता मोदी, डॉ. निशान्त और डॉ. सुहानी, निश्चेतना विभाग की डॉ. शालिनी एवं डॉ.शाहिद पीआईसीयू से डॉ. पुनीत जैन, डॉ. सन्नी मालवीया, डॉ. धारा, डॉ. रिया और डॉ. हक सहित सुभाष शर्मा, शोभना, विवेक एवं मनीष की टीम का योगदान रहा।

इस उपलब्धि पर पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पीएमसीएच हमेशा से मरीजों को विश्वस्तरीय और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि गंभीर से गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज अब उदयपुर में ही संभव है। हम बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।

बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। उसका बीपी अब बिल्कुल सामान्य रहता है और उसे अस्पताल से सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया है। घर लौटते समय परिजनों के चेहरों पर जो मुस्कान थी, वह पीएमसीएच के चिकित्सकों की सबसे बड़ी जीत है।


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