मल्टीपल फेशियल डिफेक्ट और पेट के क्षेत्र में नुकसान वाले इस हाई रिस्क हर्निया का इलाज IPOM प्लस तकनीक का उपयोग करके किया गया, इस तकनीक से ओपन सर्जरी नहीं हुई और रिकवरी भी तेज़ हुई
उदयपुरः पारस हेल्थ उदयपुर ने 54 वर्षीय एक पुरुष मरीज़ में मल्टी-क्वाड्रेट इनसिजनल हर्निया के एक दुर्लभ और मुश्किल केस का सफल इलाज किया गया। ओपन सर्जरी की जगह पर एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव लेप्रोस्कोपिक तरीके से इस केस में सफ़ल इलाज किया गया। इस केस की सफलता यह दर्शाती है कि कैसे सटीक सर्जरी से इलाज़ में मुश्किल वाले केसों में भी खतरे और रिकवरी का समय काफी कम किया जा सकता है।
इस केस में मरीज को पेट के बीच में एक बड़ा और कम होने वाला उभार था। इस उभार के साथ उसमें लगातार बेचैनी, भारीपन और रुक-रुक कर मतली हो रही थी। मरीज़ की लगभग 20 साल पहले एक ओपन अपेंडेक्टोमी और उसके बाद एक सड़क दुर्घटना के बाद एक एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी भी हुई थी। जांच में लगभग 12 cm का एक बड़ा इंसिजनल हर्निया पाया गया। इसके साथ ही ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स और पेट के हिस्से का आंशिक रूप से नुकसान का भी पता चला। इसकी वजह से आमतौर पर पारंपरिक ओपन हर्निया रिपेयर मुश्किल हो जाता हैं और अगर ओपन ऑपरेशन कर भी दिया जाए तो बाद में समस्या होती है।
हॉस्पिटल में पेट और पेल्विस के सीटी स्कैन सहित एक व्यापक डायग्नोस्टिक जांच में एक जटिल इनसिजनल हर्निया का पता चला। इसमें पेट के अलग-अलग क्वाड्रेटस में कई फेशियल डिफेक्ट और पेट की एंटीरियर दीवार से ओमेंटल एडहेसन थे। डिफेक्ट की गंभीरता और मरीज़ की पिछली सर्जरी को ध्यान में रखते हुए टीम ने खतरे का विधिवत अंदाजा लगाने के बाद पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय मिनिमली इनवेसिव तरीके को चुना।
इस प्रक्रिया का नेतृत्व पारस हेल्थ उदयपुर के बैरिएट्रिक सर्जरी और एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक-कंसलटेंट डॉ अभिषेक व्यास ने किया। उन्होंने एक एडवांस्ड IPOM प्लस (इंट्रापेरिटोनियल ऑनले मेश प्लस) लेप्रोस्कोपिक रिपेयर किया। सर्जरी तीन छोटे लेप्रोस्कोपिक पोर्ट्स के माध्यम से की गई। इन पोर्ट्स को पहले के निशान वाले टिशू से दूर लगाया गया था। इसके बाद सावधानी से एडहेसियोलाइसिस, इंट्राकॉर्पोरियल टांके लगाकर फेशियल डिफेक्ट्स का प्राइमरी क्लोजर किया गया, और पेट की दीवार की स्थिरता (स्टेबिलिटी) फिर से स्थापित करने के लिए दोहरी-परत वाली कम्पोजिट मेश से मज़बूत किया गया।
इस इलाज़ के दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए डॉ अभिषेक व्यास ने कहा, "बड़े चीरे वाले हर्निया में कई डिफेक्ट होते हैं। उनका इलाज पारंपरिक रूप से ओपन सर्जरी से किया जाता है। हालांकि पहले पेट का ऑपरेशन करवा चुके और ज़्यादा BMI वाले मरीज़ों में ओपन सर्जरी का ज़्यादा खतरा होता है। IPOM प्लस जैसी तकनीकें सर्जनों को डिफेक्ट को बंद करके और उसे मज़बूत करके मूल संरचनात्मक समस्या को ठीक करने की सहूलियत देती हैं, साथ ही टिशू को होने वाले नुकसान को भी कम करती हैं। इस तकनीक का उद्देश्य सिर्फ़ टेक्निकली सफल रिपेयर नहीं, बल्कि कम जटिलताओं के साथ पेट की दीवार को लंबे समय तक काम करने लायक मज़बूती प्रदान करना है।'
सर्जरी लगभग 110 मिनट में बहुत कम खून की हानि के साथ संपन्न की गई। मरीज को जल्दी ही चलने-फिरने दिया गया। उसे ओरल पेन किलर दिया गया, और 24 घंटे के अंदर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उसने दो हफ़्ते में अपना काम फिर से करना शुरू कर दिया। छह महीने के फॉलो-अप में मरीज में सभी लक्षण पूरी तरह से ठीक हो गए,
और बीमारी के दोबारा होने का कोई सबूत नहीं मिला, पेट की दीवार स्थिर भी थी, और कॉस्मेटिक परिणाम भी काफ़ी अच्छे थे।
इस तरह के इलाज के व्यापक प्रभाव पर अपनी राय व्यक्त करते हुए पारस हेल्थ उदयपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. प्रसून कुमार ने कहा, "कॉम्प्लेक्स सर्जिकल केसों का इलाज़ स्थानीय स्तर पर करने के लिए स्पेशलाइज्ड एक्सपर्टीज और एडवांस्ड तकनीकों में लगातार निवेश दोनों की ज़रूरत होती है। यह केस दिखाता है कि जब मिनिमली इनवेसिव सर्जरी को समझदारी से किया जाता है तो यह सुरक्षित परिणाम, हॉस्पिटल में कम समय और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में तेज़ी से सुधार ला सकता है। यह केस इस क्षेत्र में मरीजों के लिए टेर्शियरी केयर क्षमताओं को मज़बूत करने पर हमारे फोकस को और मजबूत करता है।"
इस हाई रिस्क इनसिजनल हर्निया केस के सफल परिणाम ने पारस हेल्थ उदयपुर को एडवांस्ड लेप्रोस्कोपिक और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के सेंटर के तौर पर और ज्यादा मजबूती के साथ स्थापित किया है। हॉस्पिटल मरीज़ों को ओपन सर्जरी के मुकाबले बेहतर फंक्शनल और रिकवरी परिणामों के साथ इलाज़ के बेहतर तथा मज़बूत विकल्प प्रदान करता है।