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10 मिनट में एक इंजन की धुलाई, प्रतिदिन 25 इंजनों की क्षमता

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13 Feb 26
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10 मिनट में एक इंजन की धुलाई, प्रतिदिन 25 इंजनों की क्षमता

श्रीगंगानगर । पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल अंतर्गत टीकेडी विद्युत लोको शेड में देश का पहला स्वचालित लोको धुलाई संयंत्र स्थापित किया गया है। मंडल रेल प्रबंधक कोटा श्री अनिल कालरा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में स्थापित इस आधुनिक संयंत्र का सफल परीक्षण किया गया, जिसमें दो विद्युत इंजनों की धुलाई कर प्रणाली की कार्यक्षमता का परीक्षण किया गया। संयंत्र का विधिवत कमीशनिंग कार्य शीघ्र संपन्न किया जाएगा।
यह परियोजना लगभग 1.74 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की गई है। वर्तमान में संयंत्र परीक्षण चरण में है तथा निर्धारित समयसीमा के अनुरूप इसे शीघ्र संचालन में लाया जाएगा। यह परियोजना वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक) श्री मोहन सिंह मीणा के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में स्थापित की जा रही है।
पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, कोटा श्री सौरभ जैन ने बताया कि स्वचालित लोको धुलाई संयंत्र की परिचालन क्षमता अत्यंत प्रभावी है। एक इंजन की धुलाई में अधिकतम 10 मिनट का समय लगता है तथा वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन न्यूनतम 25 इंजनों की धुलाई की जा सकती है। प्रति इंजन अधिकतम 350 लीटर ताजे जल का उपयोग किया जाता है, जबकि उपयोग किए गए जल का 75 से 80 प्रतिशत पुनर्चक्रित किया जाता है। इस उद्देश्य से 20,000 लीटर क्षमता की भूमिगत जल भंडारण टंकी तथा 10,000-10,000 लीटर क्षमता के सॉफ्ट वाटर एवं पुनर्चक्रित जल टैंक स्थापित किए गए हैं।
संयंत्र में डिटर्जेंट यूनिट, ब्रशिंग यूनिट, वॉश-ऑफ यूनिट, जल शोधन संयंत्र तथा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र जैसी उन्नत एवं एकीकृत प्रणालियां स्थापित की गई हैं। जल शोधन संयंत्र में 200 लीटर की रेजिन टंकी तथा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र में 200 लीटर की रासायनिक टंकी की व्यवस्था की गई है, जिससे धुलाई प्रक्रिया पर्यावरण अनुकूल एवं टिकाऊ बन सके।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ जैन ने बताया कि यह संयंत्र न केवल इंजनों की धुलाई प्रक्रिया को तेज, आधुनिक एवं मानकीकृत बनाएगा, बल्कि जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इससे रखरखाव प्रणाली में गुणवत्ता, समयबद्धता तथा स्वच्छता के उच्च मानक स्थापित होंगे।
कोटा मंडल द्वारा की गई यह तकनीकी पहल रेलवे की आधुनिकीकरण प्रक्रिया तथा संसाधनों के सतत उपयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 


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