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पंचांग परिशीलन एवं संस्कृत संभाषण कार्यशाला का भव्य उद्घाटन

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11 Apr 26
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पंचांग परिशीलन एवं संस्कृत संभाषण कार्यशाला का भव्य उद्घाटन

श्रीगंगानगर। श्रीधर्मसंघ संस्कृत विद्यालय में शनिवार से ज्ञान और विद्या के एक नवीन अध्याय का सूत्रपात हुआ। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, रघुनाथ कीर्ति परिसर (देवप्रयाग) के सहयोग से आयोजित दस दिवसीय पंचांग एवं संस्कृत संभाषण कार्यशाला (11-21 अप्रैल 2026) का उद्घाटन सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अतिथि सत्कार एवं स्वागत
देवभूमि देवप्रयाग से पधारे विद्वान प्रशिक्षक श्री मुकेश शर्मा जी एवं विदुषी सुश्री विभा मिश्रा जी का आचार्य श्री जितेंद्र शुक्ल श्वैदिकश् जी द्वारा परंपरागत रूप से आदरपूर्ण स्वागत किया गया।
पंचांग के ज्योतिषीय स्वरूप पर विमर्श
कार्यशाला के प्रथम दिवस पर मुख्य वक्ता सुश्री विभा मिश्रा जी ने पंचांग के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष को अत्यंत सुस्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने पंचांग के पंच अंगोंकृतिथि, वार, नक्षत्र, योग और करणकृकी महत्ता प्रतिपादित करते हुए बताया कि पंचांग भारतीय मनीषा की वह कालजयी विधा है, जिसके माध्यम से हम ब्रह्मांडीय ऊर्जा और समय के सूक्ष्म प्रभावों को समझ सकते हैं। यह केवल गणना नहीं, अपितु लोक-कल्याण हेतु समय के सदुपयोग का शास्त्र है।
प्रतिवेदन एवं प्रबंधकीय उद्बोधन
कार्यशाला का विधिवत प्रतिवेदन श्री कार्तिकेय ओझा (वैयाकरण) जी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें आगामी दस दिनों की रूपरेखा साझा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ब्रह्मचारी कल्याण स्वरूप जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धर्मसंघ का मूल आधार ज्योतिष पीठ है, अतः इस पीठ की गरिमा के अनुरूप पंचांग का सम्यक ज्ञान प्रत्येक जिज्ञासु के लिए अनिवार्य है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री दैवज्ञ मुकुन्द त्रिपाठी जी की गरिमामयी उपस्थिति में यह संकल्प लिया गया कि यह कार्यशाला संस्कृत के व्यावहारिक प्रयोग और पंचांग के व्यावहारिक ज्ञान में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
सत्र संचालन
कार्यशाला का नियमित संचालन दो चरणों में होगा
प्रथम सत्रः प्रातः 10 से दोपहर 12 बजे तक तथा द्वितीय सत्र अपराह्न 3 से सायं 4 बजे तक संचालित होगा।


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