GMCH STORIES

‘वंदे गंगा‘ जल संरक्षण जन अभियान जनभागीदारी से जल संवर्धन को मिली नई दिशा

( Read 258 Times)

20 May 26
Share |
Print This Page

‘वंदे गंगा‘ जल संरक्षण जन अभियान जनभागीदारी से जल संवर्धन को मिली नई दिशा

इस वर्ष 25 मई से 5 जून तक चलेगा अभियान
श्रीगंगानगर।
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सुशासन और जनभागीदारी का प्रमुख आधार बनाया है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने वाला ‘वंदे गंगा‘ जल संरक्षण जन अभियान-2026 का शुभारंभ गंगा दशमी के दिन 25 मई से होने जा रहा है। यह अभियान 5 जून तक चलेगा। इसके तहत प्रदेश भर में जल संचयन और पौधारोपण के कार्य किये जाएंगे।
पिछले वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से शुरू हुए अभियान को समाज के सभी वर्गों से अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हुआ। इसके परिणामस्वरूप जल संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गईं। इसी सफलता को आधार बनाकर इस वर्ष और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भू-जल स्तर सुधार और पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण जैसे विभिन्न कार्यों को प्राथमिकता से धरातल पर उतारा है। उन्हीं के मार्गदर्शन में प्रशासन, सामाजिक संगठनों, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हुई हैं।
वर्ष 2025 में अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में लगभग 3 लाख 70 हजार कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 1.32 करोड़ महिलाओं सहित कुल 2 करोड़ 53 लाख प्रदेशवासियों ने सहभागिता की। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जल संरक्षण के प्रति राजस्थान में जागरूकता बढ़ रही है। आमजन अब सिर्फ राजकीय कार्यक्रम नहीं मानते हुए अपनी पूर्ण जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
जन स्रोत हुए पुनर्जीवित, भू-जल स्तर में भी बढ़ोतरी
अभियान-2025 के दौरान 42 हजार 200 जल स्रोतों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया। इसी का सफल परिणाम रहा कि वर्षाकाल में हमारे जल स्त्रोत लबालब होने से विभिन्न स्थानों पर भू-जल स्तर में वृद्धि हुई। इसके साथ ही 73 हजार 900 कार्यालयों, अस्पतालों एवं विद्यालयों में स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। प्रदेश में लगभग 18 हजार 900 पूर्ण कार्यों का लोकार्पण एवं अवलोकन किया गया। साथ ही, 5 हजार 600 नए कार्यों की शुरुआत ने भविष्य के जल संरक्षण ढांचे को मजबूत आधार प्रदान किया गया।

जनसहभागिता से मिली सफलता
जनसहभागिता इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। प्रदेश के 1 लाख 2 हजार 100 स्थानों पर नागरिकों ने श्रमदान कर जल संरक्षण के प्रति सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया। वहीं, सीएसआर एवं दानदाताओं के सहयोग से कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के अंतर्गत 4 हजार 560 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए, इनसे भूजल स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली।
गांव-गांव पहुँचा जल संरक्षण संदेश
अभियान-2025 में जल संरक्षण का संदेश हर घर तक तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। अभियान में 13 हजार 600 ग्राम सभाएं, 6 हजार 800 प्रभात फेरियां, 9 हजार 800 कलश यात्राएं तथा 6 हजार विभिन्न प्रकार की चौपालें आयोजित हुईं। इसके साथ ही, 1 हजार 300 मीडिया कॉन्फ्रेंस एवं भ्रमण कार्यक्रम तथा 14 हजार 800 छोटी बैठकों एवं सेमिनारों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित करते हुए संकल्प दिलाया गया।
अब गंगा दशमी 25 मई से ‘वंदे गंगा‘ जल संरक्षण जन अभियान-2026 का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। इसका उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ भावी पीढ़ी के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह अभियान जनभागीदारी, सामुदायिक सहयोग और सतत विकास की भावना के साथ प्रदेश को जल समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like