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ड्रग्स के दुष्परिणाम बताते हुए किया जागरूक

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08 Jan 26
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उदयपुर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्रिधकरण अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के निर्देशों के क्रम मे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर एवं आरोग्य सेवा संस्थान के सयुंक्त तत्वाधान मे नशे के विरूद्ध अभियान शुरू किया गया है।

एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि स्कूल एवं कॉलेज के बच्चो मे ड्रग्स लेने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए इसे रोका जाना आवश्यक है। आरोग्य सेवा संस्थान द्वारा संचालित आरोग्य जिला नशा मुक्ति केंद्र द्वारा गुरूवार को टी डी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय व परसाद स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के मध्य नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें संस्था के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर विजयपाल सिंह द्वारा विद्यार्थियों को बताया गया कि नशा मुक्ति एक ऐसा अभियान है जिसका उद्देश्य लोगों को नशे की लत से मुक्त कराना है जिसका उद्देश्य लोगों को नशे की लत से मुक्त कराना है और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। नशा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक जीवन को पूरी तरह से तबाह कर देता है।

उसी के साथ आज बच्चो को मोबाइल की ऐसी लत लगी है कि वो सोते जागते, उठते बैठते, खाते पीते सिर्फ और सिर्फ फ़ोन में ही लगे रहते है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से हमारे स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है इसके अधिक उपयोग से बच्चो में चिड़चिड़ापन, सर दर्द की समस्या, नेत्र सम्बन्धित समस्या,  अनिद्रा व हृदय संबधी रोगो की संख्या बढ़ रही है। इसलिए हमे जितना हो सके उतना मोबाइल फ़ोन का कम इस्तेमाल करना चाहिए। जोगेंद्र सिंह चौहान द्वारा बताया गया कि आज हमारे देश का युवा वर्ग भी नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है इसका एक कारन है सहन शक्ति की कमी। युवा आजकल बहुत जल्दी अपना हौसला खो देते है जिसका परिणाम यह होता है की वे डिप्रेशन में चले जाते है और फिर वे नशे की गिरफ्त में फंस जाते है दूसरा बड़ा कारण यह भी है की आजकल नशा फैशन बनता जा रहा है गलत संगत में पड़कर नशे को फैशन मान लेना युवा वर्ग की सबसे बड़ी कमजोरी है। दूसरों की देखा-देखी भी लोग नशा करने लग जाते हैं। अपने आपको आधुनिक बनाने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं, जो कि गलत है। युवा वर्ग की कमजोर सोच का फायदा उठाते हुए नशे के व्यापार में लगे हुए लोग उन्हें नशे के लिए प्रेरित करने लग जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि युवा अपने आपको मजबूत बनाएं और गलत संगति से बचें।

इसी के साथ विद्यार्थियों व सभी शिक्षकगण को संस्था की निशुल्क सुविधाओं की जानकारी के बारे में बताया, तथा संस्था के पम्पलेट व विजिटिंग कार्ड वितरित किये गए। व कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों  के मध्य शपथ ग्रहण करवाई गयी। कार्यक्रम के दौरान संस्था के सुदर्शन सिंह, जोगेंद्र सिंह विशाल मेघवाल, हर्षवर्धन सिंह, कर्णिका राज चौहान, श्वेता कुंवर, रीना धोबी आदि लोग उपस्थित रहे।

नालसा  की डॉन योजना ( ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस नेविगेशन ) भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य कानूनी सहायता, जागरूकता और पुनर्वास के माध्यम से नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ना है, जिसमें कानूनी मदद, परिवारों के लिए समर्थन और हर स्कूल और गली में नशे के खिलाफ एक मजबूत आवाज देना शामिल है ताकि एक नशामुक्त भारत बनाया जा सके। यह योजना युवाओं को स्वस्थ भविष्य के लिए नशे के खिलाफ जागरूक करती है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी से लड़ना। पीड़ितों और उनके परिवारों को कानूनी सहायता और समर्थन प्रदान करना। नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना, खासकर स्कूलों और समुदायों में। नशामुक्त भारत बनाने के लिए युवाओं को जोड़ना।


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