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यूजीसी के काले कानून के विरोध में उदयपुर में सवर्ण व ओबीसी समाज की बड़ी बैठक, मेवाड़ से उग्र आंदोलन की हुंकार

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29 Jan 26
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यूजीसी के काले कानून के विरोध में उदयपुर में सवर्ण व ओबीसी समाज की बड़ी बैठक, मेवाड़ से उग्र आंदोलन की हुंकार

उदयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए कानून के विरोध में आज उदयपुर के सेवाश्रम स्थित विप्र फाउंडेशन कार्यालय पर सवर्ण एवं ओबीसी समाज की एक बड़ी संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में मेवाड़ में व्यापक और उग्र आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक में श्री राजपूत करणी सेना, विप्र फाउंडेशन, विप्र सेना, ब्रह्म शक्ति छात्र संघ, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, क्षत्रिय करणी सेना, बजरंग सेना, जैन समाज, लोहार समाज, काली कल्याण शक्ति पीठ सहित विभिन्न हिंदू संगठनों और समाजों के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी संगठनों ने एक स्वर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर लगाई गई अंतरिम रोक का स्वागत करते हुए इसे जनता की जीत बताया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस कानून पर अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन जब तक इसे पूर्ण रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठनों ने कह कि यह कानून देश में जातिगत वैमनस्य और विभाजन को बढ़ावा देने वाला है तथा भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता के खिलाफ है।
श्री राजपूत करणी सेना के उदयपुर संभाग प्रभारी डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने कहा कि 13 जनवरी 2026 को लागू किया गया यह कानून 1919 के रोलेट एक्ट की याद दिलाता है। यह कानून देश को दो हिस्सों में बांटने वाला है और समाज में जहर घोलने का कार्य कर रहा है। डॉ. दुलावत ने कहा कि देश को जिस कानून की जरूरत थी वह समान नागरिक संहिता, लव जिहाद, लैंड जिहाद और गौ-हत्या विरोधी कानून थे, लेकिन इसके बजाय सरकार ने ऐसा कानून लाकर समाज में असंतोष फैला दिया।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सर्व समाज की भागीदारी से पूरे मेवाड़ में बड़े स्तर पर चलाया जाएगा। यदि सरकार ने समय रहते इस कानून को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जल्द ही जिले भर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन, रैली और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी संगठनों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं बल्कि देश की सामाजिक एकता और भविष्य की रक्षा की लड़ाई है। मेवाड़ की धरती से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश और देश में गूंजेगी।


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