उदयपुर। युग प्रवर्तक महर्षि दयानन्द सरस्वती के जन्म दिवस के अवसर पर उनके जीवन पर आधारित लघु पुस्तक का लोकर्पण श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाष न्यास के अध्यक्ष श्री अषोक आर्य द्वारा किया गया। यह पुस्तक विष्व रिकार्ड बनाने वाले श्री चन्द्रप्रकाष चित्तौड़ा द्वारा तैयार की गई।
उक्त पुस्तक का लोकार्पण महर्षि दयानन्द सरस्वती कर्मस्थली नवलखा महल में किया गया। नवलखा महल वही स्थल है जहां महर्षि दयानन्द सरस्वती मेवाड़ के तत्कालीन शासक महाराणा सज्जन सिंह जी के आमंत्रण पर उदयपुर पधारे और साढ़े छह माह यहां प्रवास किया और अपने कालजयी ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाष का प्रणयन किया गया।
इस अवसर पर न्यास अध्यक्ष श्री अषोक आर्य ने बताया कि महर्षि दयानन्द ने अपने जीवनकाल में 30 से अधिक ग्रन्थों की रचना की उनमें उनकी प्रमुख कृति सत्यार्थ प्रकाष है जिसका प्रणयन नवलखा महल में किया गया था। उनके जन्म दिवस के अवसर पर विष्व रिकार्ड बनाने वाले श्री चन्द्रप्रकाष चित्तौड़ा द्वारा तैयार की गई लघु पुस्तिका का लोकार्पण कर हमें अत्यन्त गर्व की अनुभूति हो रही है। महर्षि दयानन्द ने समाज सुधार,देष को स्वतंत्रता दिलाने में अपना अपूरणीय योगदान दिया। महर्षि दयानन्द की इस कर्मस्थली पर कई नवाचार किए गए हैं और कई प्रकल्प तैयार किए गए। महर्षि दयानंद जी के मानस पुत्र जिन वीर हुतात्माओं ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने आप को आहूत कर दिया उनके सिलिकोन स्टैचू से युक्त अति उच्च कोटि के एक म्यूजियम का निर्माण यहां पर, एम.डी.एच. के अध्यक्ष महाशय राजीव जी गुलाटी जी ने कराया है जिसे राष्ट्र मंदिर का नाम दिया गया है,का लोकार्पण दिनांक 22 फरवरी 2026 को प्रातः 11.00 बजे किया जायेगा।
इस अवसर पर न्यास के कार्यालय मंत्री श्री भंवरलाल गर्ग, पुरोहित श्री नवनीत आर्य,लेखाकार श्री दिव्येष सुथार,गाइड श्री सिद्धम,श्रीमती दुर्गा,श्रीमती रेखा,श्री देवीलाल,श्री कालू,श्रीमती निरमा एवं न्यास के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।