उदयपुर। यूक्रेन, रूस, अमेरिका, इजराइल, ईरान सहित विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे युद्धों का जल गुणवत्ता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ रहा है, जिसका असर भारत तक भी पहुंच सकता है। विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में यह चिंता व्यक्त की गई । इस अवसर पर महिलाओं एवं बालिकाओं की अगुवाई में पिछोला घाट पर जल पूजन कर विश्व शांति की कामना की गई।
जल विशेषज्ञ एवं विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि आधुनिक युद्ध नदियों, झीलों और भूजल जैसे महत्वपूर्ण जल स्रोतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। मिसाइल प्रहार और बम विस्फोटों के कारण जल स्रोतों में विषैले तत्वों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। इनमें प्रमुख रूप से सीसा, पारा, कैडमियम, आर्सेनिक जैसे हैवी मेटल , औद्योगिक रसायन, पेट्रोलियम पदार्थ, नाइट्रेट , टी एन टी इत्यादि विस्फोटक अवशेष, जैविक विषैले तत्व तथा रेडियोधर्मी पदार्थ शामिल हैं। ये सभी तत्व जल स्रोतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
मेहता ने कहा कि समुद्री धाराएँ और वायुमंडलीय प्रवाह इन प्रदूषकों को हजारों किलोमीटर दूर तक ले जा सकते है
। पश्चिम एशिया , मिडिल ईस्ट में हो रहे संघर्ष से विसर्जित प्रदूषक अरब सागर को प्रभावित करेंगे। इससे भारत के तटीय क्षेत्रों पर दुष्प्रभाव होगा। वायुमंडल में फैले विषैले कण भी मानसून के माध्यम से भारतीय जल स्रोतों में प्रवेश कर सकते हैं।
झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि जल में मिल रहे भारी धातुएँ और विषैले रसायन मछलियों, जलचर जीवों, शैवाल और अन्य प्रजातियों के लिए घातक हैं। इससे जैव विविधता में कमी और कई प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि समुद्री जीव और मछलियाँ वैश्विक व्यापार के माध्यम से भारत तक पहुंचती हैं, जिससे ये विषैले तत्व खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। प्रवासी पक्षियों और समुद्री जीवों के माध्यम से भी यह प्रदूषण अप्रत्यक्ष रूप से भारत तक पहुंच सकता है।
समाजविद नंद किशोर शर्मा ने कहा कि युद्धों के कारण एक गंभीर पारिस्थितिक संकट उत्पन्न हो गया है। यदि जल असुरक्षित होगा, तो मानवता भी सुरक्षित नहीं रह सकेगी। जल को युद्ध का शिकार बनने से बचाना आज वैश्विक नैतिक और नीतिगत प्राथमिकता होना चाहिए।
वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह एवं कुशल रावल ने कहा कि युद्धों के कारण जल, वायु और मिट्टी सभी प्रदूषित हो रहे हैं। जल प्रकृति का ऐसा तंत्र है जो सीमाओं में बंधा नहीं रहता। युद्धजनित जल प्रदूषण केवल युद्ध क्षेत्रों की स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती है।
कार्यक्रम में दया देवी, गार्गी, हंशिका, पयस्वी सहित उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने जल पूजन कर जलस्रोत संरक्षण और विश्व शांति की प्रार्थना की।