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40 दिवसीय प्रस्तुति उन्मुख नाट्य कार्यशाला का समापन

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27 Mar 26
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40 दिवसीय प्रस्तुति उन्मुख नाट्य कार्यशाला का समापन

उदयपुर। विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में शुक्रवार 27 मार्च को नाटक ‘परसाई का संसार’ का सशक्त मंचन किया गया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन दलवी ने बताया कि गत 20 फरवरी से प्रारंभ हुए 40 दिवसीय प्रस्तुति उन्मुख नाट्य कार्यशाला में प्रतिभागियों ने देश के प्रतिष्ठित रंगकर्मी एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के पूर्व निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा से प्रशिक्षण प्राप्त किया। सभी प्रशिक्षणार्थियों ने कड़ी मेहनत से इस नाटक को सीखकर (जिसमें अभिनय, संवाद और मंच सज्जा) पहली बार मंच पर प्रस्तुत किया। इस नाटक में निर्देशन संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित प्रो. सुरेश शर्मा तथा सहायक निर्देशक तनय विवेक पाण्डेय का रहा।
प्रो. सुरेश शर्मा के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह कृति भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं और प्रतीकों व अभिनय के माध्यम से एक सशक्त नाट्य-रचना बनकर उभरी। सभी प्रतिभागियों का अभिनय अत्यंत सराहनीय रहा। हारमोनियम पर महबूब हुसैन तथा ढोलक पर तुषार राव ने साथ दिया।
रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को सर्टिफिकेट वितरित किए गए व उनके उज्जवल भविष्य के लिए कामना की गई।
इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सीएल सालवी, कार्यक्रम कार्यकारी हेमंत मेहता, राकेश मेहता, दयाराम सुथार, दीपक नवलखा, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहिता दीक्षित ने किया।
उल्लेखनीय है कि नाटक ‘परसाई का संसार’ सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की रचनाओं पर आधारित है, जिसमें समकालीन सामाजिक विसंगतियों पर तीखा और सारगर्भित व्यंग्य प्रस्तुत किया गया है। इन रचनाओं में निठल्ले की डायरी, रामसिंह की ट्रेनिंग, रानी नागफनी की कहानी (लघु उपन्यास), मातादीन चाँद पर का मंचन किया गया।
ये थे प्रशिक्षणार्थी -
अमित के. व्यास, अनिल दाधीच, भयभीत सिंह, अर्पण शर्मा, अरशद कुरैशी, कृतिका खमेसरा, चंदा पुरबिया, जेठानंद पंवार, पियूष गुरुनानी, पियूष जैन, प्रशांत मणि त्रिपाठी, प्रशांत पुरोहित, फाल्गुनी समर, भानुप्रिया रोहिल्ला, मलय पटेल, महबूब हुसैन, मुकेश गादरी, निकिता शर्मा, रंजना सुलेचा, राजेश पूर्बिया, रिया नागदेव, रुद्र प्रताप सिंह, सचिन कुमार, सदीसा नूर खान, सरस्वती भटनागर, सृष्टि भटनागर।


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