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उदयपुर ध्यान महोत्सव: समग्रम ईको-पिरामिड केंद्र में तीन दिवसीय आध्यात्मिक सत्र का भव्य आगाज़

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09 Apr 26
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उदयपुर ध्यान महोत्सव: समग्रम ईको-पिरामिड केंद्र में तीन दिवसीय आध्यात्मिक सत्र का भव्य आगाज़

उदयपुर। शोभागपुरा स्थित समग्रम ईको-पिरामिड केंद्र में उदयपुर ध्यान महोत्सव के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ हुआ। अध्यात्म, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली को समर्पित इस तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ जी सहित अन्य विशेषज्ञों ने मानव जीवन में ध्यान और ऊर्जा प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

बुद्धि और ज्ञान का संतुलन अनिवार्य

विशेष आध्यात्मिक सत्र को संबोधित करते हुए ब्रह्मऋषि प्रेमनाथ जी ने कहा कि बुद्धि का सही उपयोग केवल ज्ञान (विवेक) के माध्यम से ही संभव है। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रावण के पास प्रखर बुद्धि थी, लेकिन सही ज्ञान के अभाव में उसका पतन हुआ, जबकि भगवान श्रीराम ने अपनी बुद्धि को धर्म के साथ जोड़कर आदर्श जीवन प्रस्तुत किया।

उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनुष्य की लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा आँखों के माध्यम से और 20 प्रतिशत ऊर्जा वाणी के माध्यम से व्यय होती है। इन पर नियंत्रण रखकर व्यक्ति सहज रूप से ध्यान की ओर अग्रसर हो सकता है।

परिवर्तन का मार्ग है ध्यान

सत्र में बताया गया कि जिस प्रकार शरीर के लिए भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा के लिए ‘ध्यान’ अत्यंत आवश्यक है। ध्यान के माध्यम से प्राप्त होने वाली ब्रह्मांडीय ऊर्जा संचित कर्मों को नष्ट करने की क्षमता रखती है। पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि कैसे डाकू रत्नाकर ध्यान के प्रभाव से महर्षि वाल्मीकि बने और अंगुलिमाल जैसे व्यक्तियों का भी हृदय परिवर्तन हुआ।

समग्र जीवनशैली पर जोर

समग्रम के संस्थापक डॉ. निहाल जैन ने सेट विजडम विषय पर विचार रखते हुए कहा कि आज का व्यक्ति बाहरी चमक-धमक में अपनी आंतरिक शांति खोता जा रहा है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और आत्मिक विकास की ओर लौटने का आह्वान किया।

डॉ. निहाल जैन ने यह भी बताया कि ध्यान के लिए किसी विशेष स्थान या समय की आवश्यकता नहीं होती, इसे बस, ट्रेन या घर कहीं भी किया जा सकता है।

मानसिक तनाव का समाधान

सत्र में भावना त्रिवेदी ने बढ़ते मानसिक तनाव को कम करने के लिए महिलाओं और युवाओं को नियमित ध्यान व प्राणायाम अपनाने की प्रेरणा दी। वहीं, डॉ. चेतन दाधीच ने प्राकृतिक चिकित्सा और एक्वा योग के लाभों की जानकारी दी।

पिरामिड केंद्र के वातावरण को आंतरिक ऊर्जा (वाइब्रेशन) जागृत करने में सहायक बताया गया। इस अवसर पर शहर के 100 से अधिक ध्यान साधक उपस्थित रहे।

इस प्रकार रहेगी आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा

आयोजकों ने शहरवासियों से प्रातःकालीन सत्रों में शामिल होने की अपील करते हुए बताया कि आज 10 अप्रैल को प्रातः 5:30 से 8:00 बजे तक फतेहसागर की पाल (ओवरफ्लो पॉइंट) पर ध्यान सत्र आयोजित होगा, जबकि कल 11 अप्रैल को इसी समय प्रातः 5:30 से 8:00 बजे तक मांझी का मंदिर (हनुमान घाट) पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
 


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