उदयपुर। “हिंदी मेरी मां है और सिंधी भाषा मेरी मौसी है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी जी के उक्त वाक्य को शुक्रवार को सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर साकार करते हुए देश की मोदी सरकार ने सिंधी समाज को एक महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की है।
नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामयी आयोजन में भारत के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भारत के विकास में सिन्धी समाज के योगदान की सराहना करते हुए सिंधी भाषा (देवनागरी) में प्रकाशित भारतीय संविधान का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सिन्धी समाज की निष्ठा, लगन और परोपकार की भावना से सभी को प्रेरणा लेने की बात करते हुए सिन्धी भाषा दिवस के अवसर प्रधानमंत्री द्वारा सिन्धी समाज को दिए गए बधाई संदेश का वाचन किया।
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिंधी समाज देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि देश की जनसंख्या का मात्र 1 प्रतिशत होने के बावजूद देश के जीडीपी संग्रहण में लगभग 20 प्रतिशत तथा आयकर में लगभग 24 प्रतिशत योगदान व चेरिटी में 22 प्रतिशत सिंधी समाज का रहता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समृद्ध भाषा है इसमें 52 अक्षर हैं। सिंधी साहित्य एक समृद्ध साहित्य है।
इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने संबोधन में सिंधी समाज के विस्थापन से लेकर उसके सुदृढ़ होने तक के पूरे सफर का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंधी विभाजन के बाद अपने देश में आए और वो शरणार्थी नहीं पुरुषार्थी थे। विश्व के हर देश में सिंधी बसे हुए हैं।
राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी ने बताया कि यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी तथा सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
कार्यक्रम में उदयपुर से पूर्व मंत्री हरीश राजानी, सिंधी समाज उपाध्यक्ष कमल पाहुजा, अशोक लिंजारा, सिंधी सेंट्रल युवा अध्यक्ष विजय आहूजा, मुकेश खिलवानी, इंदौर से ईश्वर झामनानी, विशाल गिडवाणी, जयपुर से गोरधन आसनानी, मुकेश लखयानी, तुलसी संगतानी, गोविन्द गुरबानी, श्याम सतवानी व भरत आसनानी उपस्थित रहे।