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पशुपालन को सुदृढ़ करने में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका

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20 May 26
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पशुपालन को सुदृढ़ करने में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका

उदयपुर। विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने पशुपालन और कृषि उत्पादन में मधुमक्खियों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
संस्थान के उपनिदेशक डॉ. द्वारका प्रसाद गुप्ता, वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. पदमा मील डॉ. ओमप्रकाश साहु एवं डॉ. ममता सोनी ने बताया कि पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोटीन युक्त आहार अत्यंत आवश्यक है। जिस आहार में प्रोटीन अत्याधिक होता है वो पशुओं के लिए सर्वोत्तम है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा गया है कि लुसर्न में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है तथा  फसलों के बेहतर उत्पादन में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी के सहयोग के बिना लुसर्न से प्रोटीन युक्त चारा प्राप्त नहीं हो सकता। जिससे पशुओं में दुग्ध उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता है। गाय और भैंस का सबसे ताकतवर खाना बरसीम, लुसर्न हैं जिसमें 20 से 25 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इन फलीदार चारों का बीज मधुमक्खी के परागण से बनता है।  विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खियों द्वारा परागण होने से चारा उत्पादन बढ़ता है, जिससे पशुओं को पर्याप्त पोषण मिलता है और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यदि मधुमक्खियां नहीं रहेंगी तो पशुपालन, दूध उत्पादन और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत भोजन उत्पादन में मधुमक्खियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान है। वक्ताओं ने मधुमक्खियों के संरक्षण को मानव जीवन और कृषि व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया।
संगोष्ठी के तहत अन्नु चैधरी, हर्ष कुमार मीणा एवं कुलदीप बागोरा ने निबंध प्रतियोगिता के तहत बताया कि विश्व मधुमक्खी दिवस 2026 की थीम “लोंगों और धरती के लिए साथ मिलकर-मधुमक्खी” और “एक ऐसी साझेदारी जो हम सब को संभालती है।” इंसानों और मधुमक्खियों का रिश्ता हजारों साल पुराना है। एक जानकारी के मुताबिक मधुमक्खियां भारत में 40 प्रतिशत तक घट गयी है। संगोष्ठी के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खियों के संरक्षण एवं संवर्धन की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में संजय, तनुज, सुनील, दिनेश, कृष्णकांत, अनिल, गणेश योगी, अजय सैनी, प्रकाश सैनी और दुर्गासिंह सहित कई प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।


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