उदयपुर | प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं प्रवक्ता पंकज कुमार शर्मा ने विद्यालयों में व्याप्त अव्यवस्थाओं एवं विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं में हो रही देरी को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही का सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा, खेल एवं मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।
पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि जिन विद्यालयों में SPC (स्टूडेंट पुलिस कैडेट) योजना लागू है, उन विद्यालयों को प्रत्येक वर्ष मिलने वाली 50 हजार रुपये की राशि इस सत्र में नहीं दी गई। इसी प्रकार विद्यालयों को मिलने वाला अधिकतम 25 हजार रुपये का खेल बजट भी इस वर्ष जारी नहीं हुआ, जिससे खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय को वर्षभर के खर्च हेतु मिलने वाली लगभग 70 हजार रुपये की कम्पोजीट ग्रांट भारी विरोध के बाद सत्र के अंत में मार्च माह में जारी की गई, जिसके कारण अधिकांश विद्यालय उस राशि का उपयोग तक नहीं कर पाए। वहीं विद्यालयों में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव के लिए मिलने वाली 10 हजार रुपये की राशि भी इस वर्ष नहीं दी गई।
शर्मा ने आरोप लगाया कि दूरदराज गांवों से विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाला यात्रा भत्ता (बस सुविधा) भी अब तक नहीं मिला है। साथ ही जनजाति क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलने वाली विभिन्न छात्रवृत्तियां भी समय पर नहीं मिल रही हैं, जिससे गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक विद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जो शिक्षक विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए नियुक्त हैं, उन्हें भी अन्य कार्यों एवं डेपुटेशन में लगा दिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पंकज कुमार शर्मा ने यह भी कहा कि विद्यालयों में निशुल्क पाठ्यपुस्तकें समय पर नहीं पहुंची तथा विद्यार्थियों को सत्र प्रारंभ होने पर मिलने वाली यूनिफॉर्म पूरे सत्र समाप्त होने के बाद वितरित की गई, जो सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाने का वादा किया था, लेकिन आज तक कोई ठोस नीति लागू नहीं की गई।
शर्मा ने राज्य सरकार से मांग की कि विद्यार्थियों एवं विद्यालयों से जुड़ी सभी लंबित योजनाओं एवं बजट को शीघ्र जारी किया जाए, रिक्त पदों को भरा जाए तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।