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संस्कृत भाषा बोधन वर्ग शुरु, हुए पंजीयन

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03 Jun 26
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संस्कृत भाषा बोधन वर्ग शुरु, हुए पंजीयन

उदयपुर।   संस्कृत भारती उदयपुर विभाग (चित्तौड़ प्रांत) के तत्वावधान में छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग बुधवार, 3 जून से शुरू हुआ। विद्या निकेतन बालिका विद्यालय, हिरण मगरी सेक्टर-4 में होने जा रहा यह वर्ग 8 जून तक पूर्णतः संस्कृतमय वातावरण में संचालित किया जाएगा। इस वर्ष का ध्येय वाक्य “मातृभाषा संस्कृतम्, मातृभूमि भारतम्” निर्धारित किया गया है। वर्ग में आए बालक बालिकाओ व संस्कृत अनुरागियों का हुआ पंजीयन।


संस्कृत भारती के विभाग संयोजक दुष्यंत नागदा एवं वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य ने बताया कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, संस्कृति और जीवन मूल्यों की मूलाधार भाषा है। इसी दृष्टि से संस्कृत को व्यवहार की भाषा बनाने तथा समाज के विभिन्न वर्गों को इससे जोड़ने के लिए इस विशेष वर्ग का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्ग में कक्षा आठवीं से ऊपर के विद्यार्थी, युवा, शिक्षक, गृहिणियां तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संस्कृत अनुरागी भाग ले सकेंगे। प्रतिभागियों को सरल एवं संवादात्मक पद्धति से संस्कृत बोलना, शुद्ध उच्चारण, दैनिक व्यवहार में संस्कृत का प्रयोग तथा प्रभावी संवाद कौशल सिखाया जाएगा। संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण खेल-खेल में दिया जाएगा, जिससे भाषा सीखना सहज और रुचिकर बन सके।

वर्ग के दौरान प्रतिदिन योगाभ्यास, प्रार्थना, संस्कार गीत, संस्कृत गीत, संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण तथा विविध सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। इसके अतिरिक्त पंचांग एवं भारतीय कालगणना, वैदिक चिंतन, प्रेरक कथाएं, भारतीय ज्ञान परंपरा, व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व निर्माण जैसे विषयों पर विशेष सत्र भी होंगे। 

आयोजकों के अनुसार संपूर्ण शिविर संस्कृतमय वातावरण में संचालित होगा, जिससे प्रतिभागियों को भाषा के व्यावहारिक प्रयोग का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा। संस्कृत माध्यम से समूह चर्चा, नाट्य प्रस्तुति, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संवाद सत्र प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, अनुशासन तथा नेतृत्व क्षमता के विकास में सहायक सिद्ध होंगे। 

संस्कृत भारती के पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्व में आयोजित वर्गों को समाज से उत्साहजनक प्रतिसाद मिला है। इस वर्ष का आयोजन संस्कृत प्रचार-प्रसार, सांस्कृतिक जागरण और भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्मरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। संगठन ने संस्कृत प्रेमियों और युवाओं से इस अभियान में सहभागिता का आह्वान किया है।


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