उदयपुर। संस्कृतभारती उदयपुर विभाग (चित्तौड़ प्रांत) के तत्वावधान में यहां हिरणमगरी सेक्टर 4 स्थित विद्या निकेतन बालिका विद्यालय में चल रहे छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग के तृतीय दिवस शुक्रवार को संस्कृतमय वातावरण में विविध शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया। दिनभर चले सत्रों में प्रतिभागियों ने संस्कृत संभाषण, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा संस्कृत गीतों के माध्यम से भाषा एवं संस्कृति के प्रति अपनी समझ को और समृद्ध किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातः स्मरण एवं योगाभ्यास से हुआ। इसके पश्चात वर्ग गीत और प्रार्थना के माध्यम से प्रतिभागियों ने दिनचर्या का प्रारम्भ किया। आदर्श संभाषण शिविर के अंतर्गत बहुवचन पाठनम्, शब्दों के लिंगभेद, सप्तमी विभक्ति, अद्य-श्वः-परश्वः तथा समय ज्ञानम् जैसे विषयों का अभ्यास कराया गया। विभक्ति पाठन सत्र में विशेष रूप से सप्तमी एवं द्वितीया विभक्तियों का सरल एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
भाषा क्रीड़ा सत्र में ‘नायक अन्वेषणम्’ सहित विभिन्न रोचक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को संस्कृत में संवाद करने के लिए प्रेरित किया गया। चर्चा सत्र में संस्कृत संभाषण के महत्व, उसकी वैज्ञानिकता तथा दैनिक जीवन में उसके उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ। अंतिम सत्र में प्रतिभागियों ने संस्कृत समूह गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर वातावरण को संस्कृतमय बना दिया।
शिविर में संस्कृत संभाषण, संस्कृत गीत, गीता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष अध्ययन कराया गया। मध्याह्न भोजन भी भारतीय परंपरा के अनुरूप भोजन मंत्र के उच्चारण के साथ पंक्तिबद्ध व्यवस्था में संपन्न हुआ। संपूर्ण भोजन व्यवस्था संस्कृतमय संवाद एवं पर्यवेक्षण के साथ संचालित की गई।
शुक्रवार को शिविर के अवलोकन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक हेमेंद्र श्रीमाली, पुलिस निरीक्षक आदर्श परिहार तथा विभाग घुमंतू योजना प्रमुख पंकज पालीवाल, प्रांत धर्मजागरण समन्वय संयोजक, लेखाकार प्रदीप कुमार, पेसिफिक इंडस्ट्री के सुरेश उपाध्याय, व. लेखाकार रवि शर्मा आदि उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों से संवाद कर संस्कृत भाषा के महत्व और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
वर्ग में प्रमुख शिक्षक श्रेयांश कंसारा एवं गौरव साहू के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण संचालित हुआ। प्रबंधक दिव्यांशु मेहरान, विशाल लक्ष्मण, आंचल चौधरी, लारा उपाध्याय, ईशा पालीवाल, दिव्यांशी पालीवाल, मीनाक्षी द्विवेदी, केशव नागदा, हेमंत जिनगर सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया।
आयोजकों ने बताया कि संस्कृत भाषा केवल ज्ञान की धरोहर ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व निर्माण और सांस्कृतिक जागरण का प्रभावी माध्यम भी है। यही कारण है कि शिविर में प्रत्येक गतिविधि संस्कृत को व्यवहार की भाषा बनाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।