उदयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), उदयपुर में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण विषयक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा डीएलएड शिक्षक-प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं जिला शिक्षा अधिकारी शीला काहाल्या ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक समाज का पथप्रदर्शक होता है। यदि शिक्षक-प्रशिक्षु पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे तो वे आने वाली पीढ़ियों में भी प्रकृति संरक्षण के संस्कार विकसित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल पौधा लगाना नहीं, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल करना होना चाहिए।
पी एंड एम प्रभारी डॉ. मृदुला तिवारी ने विश्व पर्यावरण दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अभियान आज एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक एवं जैविक पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। ईटी प्रभागाध्यक्ष बीना कंवर राजपूत ने वर्ष 2026 की वैश्विक थीम ‘प्रकृति के साथ जीना’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव को प्रकृति पर प्रभुत्व स्थापित करने के बजाय उसके साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना सीखना होगा।
गिरीश चैबीसा ने खेजड़ली बलिदान और चिपको आंदोलन का स्मरण कराते हुए दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक के बहिष्कार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए उपस्थित सभी संभागियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की सामूहिक शपथ दिलाई।
इस अवसर पर प्राध्यापक हरिदत्त शर्मा एवं त्रिभुवन चैबीसा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डीएलएड प्रथम वर्ष के विकास मौसठ, भावेश पटेल, मोनिका गुप्ता तथा द्वितीय वर्ष के ललिता गुर्जर, ऋषभ मेहता, मानस कलाल, इंदिरा गरासिया, जयदेव सिंह पंवार और रोनकराज सिंह भी विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में सत्यप्रिय आर्य, गायत्री जोशी, दीपक सेन, सुरेन्द्र सिंह शक्तावत, अमिता शर्मा, रियाज अहमद, पुस्तकालयाध्यक्ष कल्पना दीक्षित एवं चिराग सेनानी सहित संस्थान परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थान की प्राचार्या ने रमेश बड़गुर्जर एवं नीरू बेन के सहयोग से संस्थान परिसर में पौधारोपण किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।